सर्दी, साइबेरिया और सदियों का नाता

Nainital Updated Mon, 24 Dec 2012 05:31 AM IST
हल्द्वानी। सर्दी बीताने को साइबेरिया से पक्षी तराई के जलाशयों में पहुंच गए हैं। इसमें सुरखाब से लेकर कई और प्रजातियों के पक्षी हैं जोे करीब दस हजार किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे हैं। टांडा जंगल में स्थित हरिपुरा डैम जलाशय साइबेरिया बर्ड से भर गया है। जहां पक्षी फरवरी तक रहेंगे।
इन दिनों साइबेरिया में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। तापमान शून्य से नीचे पहुंच जाता है। इस असहनीय मौसम से बचने के लिए साइबेरिया से पक्षियों का समूह तुलनात्मक तौर पर गर्म इलाकों की तरफ उड़ान भरता है। पक्षियों का काफिला नवंबर से भारत पहुंचने लगता है। वह एक खास रास्ता चुनते हैं, जिसको ‘सेंट्रल एशियन फ्लाई वे’ कहा जाता हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि पक्षी करीब दस हजार किलोमीटर का सफर तय करते हुए तिब्बत को पार करते हैं, यहां तराई में तुमड़िया, हरिपुरा, बौर जलाशय आदि में ये सबसे पहले नजर आते हैं। जहां वह खाने और रहने के लिए फरवरी तक रुकते हैं। इसके बाद वापस साइबेरिया के लिए उड़ जाते हैं। इस बार भी हरिपुरा, बौर आदि जलाशयों में भी सैकड़ों पक्षी पहुंचे। जिनकी रौनक देखते बनती है। डैम के काफी इलाके में पक्षी और उनके बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं। वन संरक्षक पश्चिम वृत्त समीर सिन्हा कहते हैं कि आमतौर पर साइबेरिया से सुरखाब, ब्राह्मी डक, पिनटेल, रेड क्रस्टड, पोचार्ड, कामन पोचार्ड, विजयन, कामन टिल पक्षियों की प्रजाति आती है। इस बार भी तराई, रामनगर इलाके में बड़ी संख्या में पक्षी पहुंचे हैं।

ऊर्जा बचाने को उड़ते एक साथ
हल्द्वानी। हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर साइबेरिया यहां पर पहुंचते हैं। इस बाबत सीएफ समीर सिन्हा कहते हैं कि विश्व में पक्षियों की करीब नौ हजार प्रजातियां है। इसमें 1800 प्रजाति ही माइग्रेट करती हैं। माइग्रेशन करने वाली चिड़िया एक साथ ‘वी शेप’ जैसे खास तरह उड़ती है, इसके पीछे पक्षी विशेषज्ञ ऊर्जा बचाने की तकनीक बताते हैं। इस तरह से उड़ने पर पक्षियों की 15 से 20 प्रतिशत तक ऊर्जा बचती है।

जहर से करते शिकार
हल्द्वानी। यह पक्षी शेड्यूल-4 के हैं और इनकी पोचिंग-हटिंग दोनों प्रतिबंधित है। आमतौर पर शिकारी मुर्गे की आकार वाले इन पक्षियों का शिकार जहर के जरिए करते हैं। इसमें हल्का जहर आटे की गोली में लगाकर पत्तों पर रख जाता है, इसके बाद पक्षी जब खाता है तो वह लुढ़क जाता है। इसके बाद उसको बोट से पकड़ लिया जाता है। जाड़ों में यह शिकार होता है।


खास बात
- राजहंस जैसा पक्षी 6000 से 6500 मीटर की ऊंचाई तक देखा गया है
- फरवरी तक जलाशयों में रहते हैं और ब्रीडिंग भी करते हैं।
- ब्राह्मी डक, पिनटेल, रेड क्रस्टड, पोचार्ड, कामन पोचार्ड, विजयन, कामन टिल आदि प्रजातियां आती है
- 9000 हजार पक्षियों की प्रजाति हैं। इसमें 1800 पक्षी माइग्रेट करती हैं।
- समूह में एक साथ उड़ते हैं, जिससे ऊर्जा बचे रहे।
-

Spotlight

Most Read

Chandigarh

बॉर्डर पर तनाव का पंजाब में दिखा असर, लोगों में दहशत, BSF ने बढ़ाई गश्त

बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान में हो रही गोलीबारी का असर पंजाब में देखने को मिल रहा है, जहां लोगों में दहशत फैली हुई है। बीएसएफ ने भी गश्त बढ़ा दी है।

21 जनवरी 2018

Related Videos

देहरादून में आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने किया गिरफ्तार, ये हैं आरोप

वेतनमान बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बता दें कि आशा कर्यकर्ता देहरादून के परेड ग्राउंड के पास धरना प्रदर्शन कर रही थीं जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

14 अक्टूबर 2017

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper