उपभोक्ता के गैस कोटे पर भी टेड़ी नजर

Nainital Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। सस्ते सिलेंडरों की दौड़ का इंडिग प्वाइंट ‘6’ है। यानि पूरे सालभर का इतना ही कोटा। अपने खाते से अब कोई एक भी सिलेंडर दूसरे को नहीं देना चाहता। ऐसे में यदि एजेंसी स्तर पर ही खाते में गोलमाल हो जाए तो...। गैस एजेंसियों की उपभोक्ता के कोटे पर नजर गढ़ी है। कोई गैस बुक कराए और किसी कारणवश सिलेंडर नहीं ले पाए तो उसका सिलेंडर बेचा जा रहा है। इंडेन गैस में इस तरह की शिकायतें ज्यादा देखने को मिल रही हैं। क्योंकि इंडेन के वितरण का काम ठेके पर है और डिलीवरी ब्वाय को बुकिंग पर्चे थमा दिए जाते हैं। डिलीवरी ब्वाय से लेकर ठेकेदार तथा एजेंसी तक का रोल इस मामले में संदिग्ध है।
गैस सिलेंडरों के रेट प्रतिमाह रिवाइज हो रहे हैं और इसी का फायदा उठाकर उपभोक्ता के खाते में डाका पड़ रहा है। क्योंकि रिवाइज रेट के बाद पुराने रेट की पर्चियां एजेंसी स्तर पर निरस्त कर दी जाती है। पुराने रेट की पर्ची अगर उपभोक्ता एजेंसी में लाए तो उसमें संशोधन की व्यवस्था बनी है, पर लोग इस झमेले से अंजान हैं। यानि पर्चे को निरस्त मानकर नई बुकिंग कराने वाले उपभोक्ता का निरस्त पर्चे वाला गैस सिलेंडर उसके खाते में डिलीवर्ड कर दिया जाता है। नवंबर माह में रेट रिवाइज के बाद अक्तूबर की जिन पर्चियों को निरस्त किया गया था, उसमें से दर्जनों उपभोक्ताओं के खाते से सिलेंडर घटाया गया है। जबकि लोगों ने सिलेंडर लिया ही नहीं।
इंडेन गैस वितरण ठेकेदार के हाथ में होने से एजेंसी में बुक होने वाली पर्चियां रोज शाम को ठेकेदार को दी जाती हैं और उसके बाद डिलीवरी ब्वाय पर्चियों के सहारे सिलेंडर बांटने का काम करते हैं। एजेंसी, ठेकेदार और डिलीवरी ब्वाय यही उपभोक्ता के ऊपर की कड़ी हैं। अब उपभोक्ता ने सिलेंडर नहीं लिया तो खाते की संख्या कैसे घटी और कैसे सिलेंडर डिलीवर्ड दर्शाया गया, यह बड़ा सवाल है। यहां बता दें कि कालाबाजारी के धंधे से मुनाफा कमाने वालों पर सालाना कोेटे का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। क्योंकि ब्लैकियों तक आसानी से गैस पहुंच रही है।

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