एसटीएच: निजाम बदला, चिकित्सा सेवाएं नहीं

Nainital Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल फौज का किला बन गया है। रिटायर्ड फौजी प्रशासकों के हाथों अस्पताल की कमान आने के बाद चिकित्सा सेवाएं तो नहीं बढ़ी हैं, लेकिन व्यवस्थाओं की आड़ में अस्पताल परिसर की नाकेबंदी कर दी है। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष तक जाने वाली सड़क पर लोहे की सलाखों खड़ी कर दी हैं। आपातकालीन कक्ष से वार्डों को जोड़ने वाला प्रमुख द्वार भी बंद कर दिया है। इससे व्यवस्थाएं तो नहीं सुधरी, लेकिन भर्ती मरीजों एवं तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। कोई हादसा होने पर अस्पताल प्रशासन की नाकेबंदी मरीजों एवं तीमारदारों पर भारी पड़ सकती है।
डा. सुशीला तिवारी कुमाऊं का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। अस्पताल में उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती जिलों के अधिकतर मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं बदहाल हैं। सीनियर चिकित्सकों की कमी है। कई विभागों में मुखिया तक नहीं हैं। डाक्टरों की मनमर्जी है। डाक्टर मरीजों को भर्ती करने के बजाए प्राइवेट अस्पतालों में रेफर करने की सलाह देते हैं। कई चिकित्सक तो कमीशन पर निजी अस्पतालों में मरीजों का आपरेशन करने जाते हैं। अस्पताल की जांच मशीनें भी सालों से खराब पड़ी हैं।
अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं और व्यवस्थाओं में सुधार लाने के मकसद से शासन ने तत्कालीन प्राचार्या डा. एनएस ज्याला को हटाकर डा. आरसी पुरोहित को कमान सौंप दी। डा. पुरोहित फौज से सेवानिवृत्त कर्नल और सुशीला तिवारी में ही गायनी विभागाध्यक्ष हैं। डा. पुरोहित की ताजपोशी के कुछ माह बाद चिकित्सा अधीक्षक की बागडोर भी सेवानिवृत्त कर्नल डा. एके तिवारी को सौंप दी गई। दोनों फौजी अफसर अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं तो नहीं बढ़ा सके, लेकिन अस्पताल को किले में बदल दिया। बजट चिकित्सा सेवाओं में सुधार लाने के बजाए अस्पताल की चौकसी में खर्च हो रहा है। आपातकालीन कक्ष तक पहुंचने वाली एंबुलेंस और मरीज ले जाने वाले वाहनों को कई बार इंतजार करना पड़ता है। आपातकालीन कक्ष के बाहर अनावश्यक वाहनों का दबाव कम करने के नाम पर सड़क पर लोहे का गेट खड़ा करवा दिया है। गेट 24 घंटे बंद रहता है।
अस्पताल की ओपीडी दोपहर दो बजे तक चलती है। ओपीडी बंद होने के साथ अस्पताल बिल्डिंग के प्रवेश द्वार पर भी ताले लटक जाते हैं। दोपहर बाद मरीज और तीमारदार कैंटीन से सटे ब्लाक से प्रवेश एवं निकासी करते हैं। सात सौ बेड के अस्पताल में एक ही गेट से प्रवेश और निकासी होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सुशीला तिवारी अस्पताल की नाकेबंदी करने के बाद अब मेडिकल कालेज की तैयारी है। कालेज परिसर में बरेली रोड का गेट बंद किया जा रहा है।

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