गौला बाईपास पुल बनने के बाद ही परमिट

Nainital Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रमुख शहर हल्द्वानी में जब तक गौला बाईपास पुल नहीं बन जाता, तब तक यहां वाहनों के नए परमिट भी नहीं दिए जा सकते। शहर की सड़कें पहले ही ट्रैफिक के भारी बोझ से दबी हैं, इन हालातों में नए परमिट दे दिए गए तो फिर समस्या से पार पाना मुश्किल हो जाएगा। शनिवार को संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में यह चिंता उभरकर सामने आई। इसी आधार पर प्राधिकरण ने हल्द्वानी में किसी भी तरह के वाहनों को नए परमिट संबंधी आवेदन पत्रों को सिरे से खारिज कर दिया।
काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में कुमाऊं कमिश्नर हेमलता ढौंडियाल की अध्यक्षता में हुई प्राधिकरण की बैठक में सीमित संख्या में परमिट दिए गए। पिछली बैठकों की तरह उदारता नहीं बरती गई। जो परमिट जारी भी हुए हैं, उनमें अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों के ही है। अल्मोड़ा में सिटी बस चलाने पर सहमति बनी है। रोडवेज ट्रायल के बाद अल्मोड़ा में सिटी बस सेवा शुरू करेगा। आरटीए की यह बैठक करीब दो साल से लटकी हुई थी। नए रूटों पर परमिट, वाहनों की संख्या बढ़ाने आदि पर फैसला नहीं हो सका था। ऐसे में वाहन स्वामियों की निगाहें बैठक पर लगी हुई थी। हल्द्वानी-लालकुआं, हल्द्वानी-रुद्रपुर रूट पर इंटर सिटी बसों के परमिट की सबसे ज्यादा डिमांड थी। 566 आवेदन इन दोनों रूटों के लिए आए थे। हल्द्वानी शहर के आसपास से लिंक मार्गों पर भी दूसरे वाहनों के परमिट मांगे गए थे। अधिकारियों का मानना था कि हर रोज पहाड़ को आने-जाने वाले सैकड़ों वाहन हल्द्वानी से होकर गुजरते हैं और सड़कों की स्थिति ऐसी नहीं है, जो ट्रैफिक का और दबाव झेल सकें, लिहाजा गौला बाईपास पुल बनने और नगर निगम सीमा के नये सिरे से नोटिफिकेशन के बाद ही नए परमिट दिए जाने पर विचार होगा। कार्बेट पार्क क्षेत्र में टैक्सी संचालन के लिए भी 60 आवेदन आए थे। इस पर कार्बेट पार्क प्रबंधन से वस्तु स्थिति की पूरी जानकारी लेने के बाद ही परमिट देने पर सहमति दी।
अल्मोड़ा जिला प्रशासन के अनुरोध पर शहर में सिटी बस चलाने की अनुमति आरटीए ने दी है। जेएनआरयूएम के तहत नैनीताल रीजन को नैनीताल से रुद्रपुर, किच्छा, काशीपुर आदि स्थानों के लिए नए 16 परमिट दिए गए हैं। रोडवेज के टनकपुर रीजन को भी 10 बसों के परमिट दिए गए है। सिडकुल में श्रमिकों की सुविधा के लिए फैक्ट्री प्रबंधकों को आसपास के इलाकों के लिए 70 परमिट दिए गए हैं। पर्वतीय रूटों पर टैक्सी, मैक्सी कैब के भी परमिट दिए गए हैं। इसके अलावा चार टूरिस्ट बसों को भी परमिट दिए गए हैं।
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केमू को लेकर सबसे ज्यादा विवाद
केमू को लेकर सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति रही। केमू की ओर से हल्द्वानी रीजन में 250 और रामनगर में 99 लोगों ने नए परमिट को आवेदन किया था। केमू बस संचालक सर्किट हाउस पहुंच कर अपने पुराने विवाद को हल करने का दबाव बनाने लगे। उनकी मांग थी कि आरटीए में सामूहिक तौर पर नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की बात अलग-अलग सुनी जाए। इस बाबत आरटीए सचिव एसके सिंह का कहना था कि सीमित समय में सैकड़ों लोगों की सुनवाई नहीं हो सकती है, लिहाजा उनके लिए अलग से एक मीटिंग की जाएगी। बैठक में आरएम रोडवेज खुशीराम, आरटीए सदस्य राजीव साह आदि भी शामिल थे।

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