एक बेटे को मां ने दो बार दिया जन्म

Nainital Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। ‘नैना और पवन’। ये दोनों नाम एक-दूसरे के लिए गुमनाम हैं। नैना दुधमुंही बच्ची है तो पवन एक नौजवान। सामाजिक रिश्तों में बेशक इनके बीच मीलों का फासला होगा, मगर इसी समाज में एक के दर्द ने दुनिया की ज्योत कही जाने वाली ‘मां और उसकी ममता’ की हत्या की, तो दूसरे के दर्द को ममत्व ने दुबारा जन्म देकर ‘मां’ शब्द मान बढ़ा दिया। 42 साल की खिमुली देवी। पहाड़ के सुदूर गांव की अनपढ़, परंतु साक्षर मां। वो मां जिसकी अंगुली से पवन ने चलना सीखा, जिसके दूध ने बचपन सींचा और आज 18 वर्ष बाद खिमुली ने फिर अपने उसी लाडले को नया जन्म देकर साबित किया है कि जिसके पास मां है उसके पास जहां है।
खिमुली के तीन बेटों में सबसे बड़ा है पवन कुमार। ओखलकांडा ब्लाक के पुटपुड़ी गांव की इस महिला का परिवार मुफलिसी में जीता है। ठीक एक साल पूर्व यानि दिसंबर 2011 में पवन को पेट में दर्द शुरू हुआ था। जब उसका चेकअप कराया गया तो पता चला कि पवन की एक किडनी खराब है। यह सुनते ही मां खिमुली का कलेजा दर्द से कराह गया। क्योंकि सवाल बेटे की जिंदगी का था और सामने गरीबी का कोढ़। खेतीबाड़ी से गुजर-बसर करने वाले पवन के पिता हरीश चंद्र हिम्मत हार चुके थे, लेकिन मां के कदम नहीं हिले।
खिमुली ने अपनी किडनी से बेटे को बचाने की ठानी और सिर्फ दिल्ली एम्स तक पहुंचकर आपरेशन के लिए रिश्तेदारों, करीबियों से उधारी मांगी। बीती 21 नवंबर को एम्स में सफल आपरेशन के बाद पवन की आंख एक नए उजियारे के साथ खुली है। दो लाख 75 हजार रुपये का खर्च इलाज में आया है। खुद खिमुली भी स्वस्थ हैं। उनके चेहरे पर चमक है बेटे को सलामत देखकर। बाकी का जीवन एक किडनी के सहारे कैसे गुजरेगा, इसकी परवाह नहीं। बस सवाल है तो उधारी को चुकता करने का। क्योंकि परिवार गरीबी की रोटी तोड़ रहा है। जन्म के बाद जीवन और फिर से जन्म देने वाली इस मां को पवन पर भरोसा है। वह कहती हैं कि बेटे ने अभी इंटर की पढ़ाई की है। उसे मेहनत से पढ़ाकर आगे बढ़ाना अब मेरा लक्ष्य है। खिमुली की इस कहानी को लिखने से पूर्व हमने शुरूआत नैना और पवन से की थी। नैना को आप सब जानते हैं। वो बिटिया आज अल्मोड़ा शिशु सदन में मां को ढूंढ रही है, लेकिन पवन के पास मां और ममता दोनों हैं।

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