अवैध कब्जेदारों के हवाले की साढ़े पांच करोड़ की जमीन

Nainital Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। इंद्रानगर स्थित 13 बीघा में बिजली विभाग ने कम से कम साढ़े पांच करोड़ की भूमि अवैध कब्जेदारों के हवाले कर दी। जिला प्रशासन ने करीब पौने दो वर्ष पहले 11.78 बीघा भूमि बिजली सब स्टेशन समेत अन्य सरकारी निर्माण कार्यों के लिए बिजली विभाग को दी थी। तब जिला प्रशासन ने इस भूमि पर अवैध कब्जे की आशंका जताते हुए सुरक्षा की खातिर पूरी जमीन की घेराबंदी करने को कहा था पर विभाग ने मात्र 3.81 बीघा में ही बाउंड्री वाल बनाकर शेष भूमि को अवैध कब्जदारों के भरोसे छोड़ दिया।
इंद्रानगर स्थित कब्रिस्तान के पास 13 बीघा नजूल भूमि है। करीब दो साल पहले भू माफियाओं के यहां प्लाट काटकर बेचने का मामला सुर्खियों में आया तो जिला प्रशासन ने पुलिस बल की मदद से अवैध कब्जेदारों को खदेड़कर भूमि को खाली करा दिया। तेरह बीघा में से एक बीघा भूमि ट्यूबवेल के लिए दे दी गई थी जबकि 0.22 बीघा भूमि पर छह भूखंडों पर कोर्ट का स्टे था। शेष 11.78 बीघा भूमि बिजली सब स्टेशन और अन्य विभागीय निर्माण कार्यों के लिए बिजली विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। लेकिन बिजली विभाग ने 3.81 बीघा भूमि की घेरेबंदी कर शेष 7.97 बीघा भूमि अवैध कब्जेदारों के लिए छोड़ दी। शहर के बीचोंबीच होने से इस भूमि की मार्केट वेल्यू भी अच्छी खासी है। कब्जेदारों ने यहां एक हजार रुपये वर्ग फुट की दर से प्लाट बेचे हैं। यहां 6808 वर्ग फुट का एक बीघा गिना जाता है। इस हिसाब से 7.97 बीघा भूमि कुल 542259.76 वर्ग फुट बैठती है। अब एक हजार रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से ही हिसाब लगाया जाए तो इस भूमि की कीमत पांच करोड़ 42 लाख 25 हजार रुपये तक है।

बिजली विभाग को दी है पूरी जमीन
जिला प्रशासन ने खंगाला पूरा रिकार्ड
हल्द्वानी। 13 बीघा भूमि के मालिकाना हक पर मचे घमासान के बीच जिला प्रशासन ने भूमि के पूरे रिकार्ड खंगाले हैं। जिलाधिकारी निधिमणि त्रिपाठी ने शुक्रवार को बिजली विभाग के अधिशासी अभियंताओं को बुलाकर सही स्थिति को सामने रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि भूमि विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है, लिहाजा इसकी सुरक्षा का पहली जिम्मेदारी बिजली महकमे की है। अवैध कब्जे होने पर इसके लिए विभाग के अफसर जिम्मेदार होंगे।
जिलाधिकारी ने इस संबंध में पूछे जाने पर बताया कि भूमि हस्तांतरण का पूरा रिकार्ड उन्होंने स्वयं चेक किया है। हस्तांतरण दस्तावेजों में जिला प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। हस्तांतरण दस्तावेजों की फाइल की प्रति ऊर्जा सचिव और विभागाध्यक्ष को भी भेजी गई थी। जिला प्रशासन ने पूरी जमीन को खाली कराकर बिजली विभाग के हवाले किया था। तब विभाग को तीन दिन के भीतर पूरी भूमि की घेराबंदी करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
जिलाधिकारी ने नगर निगम अधिकारियों की उदासीनता पर भी गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति की रक्षा करना हर विभाग के पहला दायित्व है, जब जमीन पर दुबारा कब्जे हो रहे थे तो निगम अधिकारियों ने इसकी सूचना जिला प्रशासन को क्यों नहीं दी।

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