प्रदेश में उपेक्षित हैं विकलांग

Nainital Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। प्रदेश सरकार विकलांगों के प्रति कतई संवेदनशील नहीं है। विकलांगों के लिए तमाम कल्याणकारी योजनाएं चलाने की घोषणाएं समय-समय पर की जाती रही हैं लेकिन किसी भी घोषणा पर इमानदारी से पहल नहीं की जा रही है। विकलांगों को सुविधा के नाम पर कोरी बयानबाजी की जा रही है।
प्रदेश सरकार ने दो वर्ष पूर्व विकलांगों के कल्याण के लिए प्रत्येक जिले में जिला पुनर्वास केंद्र की स्थापित करने के निर्देश दिए थे। सरकार के निर्देशों के अनुपालन में समाज कल्याण निदेशालय ने सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजकर जल्द से जल्द पुनर्वास केंद्र स्थापित करने को कहा था। इन केंद्रों पर विकलांगों के इलाज की पर्याप्त सुविधा के साथ ही उपकरण भी उपलब्ध कराए जाने थे। विकलांग पुनर्वास केंद्रों के लिए प्रत्येक जिले को पांच-पांच लाख रुपये दिए गए थे। यह धनराशि विकलांग पुनर्वास केंद्रों पर उनके लिए आवश्यक सुविधाएं और सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए खर्च की जानी थी। पुनर्वास केंद्रों का संचालन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित हास्पिटल मैनेजमेंट कमेटी करना था। स्थानीय स्तर पर भी पुनर्वास केंद्र के लिए जिला चिकित्सालय, बेस अस्पताल या निकटस्थ चिकित्सालय में दो कक्ष आवंटित किए जाने का प्रस्ताव था। पुनर्वास केंद्रों पर शौचालय, पेयजल आदि की व्यवस्था भी की जानी थी। समाज कल्याण निदेशक के ओएसडी आरपी पंत के मुताबिक पुनर्वास केंद्रों के संचालन के लिए धनराशि समय पर अवमुक्त करा दी गई थी। फिलहाल रामनगर में एक प्राइवेट एजेंसी पुनर्वास केंद्र का संचालन कर रही है।

हरमीत को मिलेगी पेंशन
हल्द्वानी। समाज कल्याण निदेशक एचसी सेमवाल का कहना है कि सड़क पर अंडे बेचकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हरमीत के विकलांगता प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी। नब्बे फीसदी विकलांग होने और पात्र होने पर उसकी पेंशन स्वीकृत की जाएगी। हरमीत के प्रमाण पत्रों की जांच कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं। बता दें कि अमर उजाला ने रविवार के अंक में विकलांग हरमीत के जज्बे और विकलांगता प्रमाण पत्र के बावजूद उसे पेंशन नहीं दिए जाने संबंधी खबर प्रकाशित हुई थी। खबर का संज्ञान लेते हुए समाज कल्याण निदेशक ने यह निर्देश जारी किए हैं।

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