आशा, विश्वास और जज्बे का ‘यंग इंडिया’

Nainital Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। इंसान की बनावट या फिर चेहरा उसके मेहनतकश होने और संघर्ष के जज्बे का प्रमाण नहीं होता। ‘निराशा’ जिंदगी को अस्थिर कर देती है और ‘आशा’ से जीने का तजुर्बा विकसित होता है। सांसारिक जीवन के उतार-चढ़ावों को झेलने के लिए साथ नहीं हिम्मत चाहिए। यदि 15 वर्ष पूर्व हरमीत मौर्य ऐसा साहस नहीं दिखा पाता, तो शायद नश्वर शरीर के दाहिने हाथ की तरह उसके ख्वाब भी आटा चक्की के पट्टों में ही कट गए होते। एक हाथ ने हरमीत का जीवन ऐसा बदला कि आज हल्द्वानी की सड़क पर सुबह रिक्शे में तो शाम को अंडे की ठेली पर ‘यंग इंडिया’ का नारा इस युवक की जिंदादिली साकार करती है।
मुफलिसी में जीने वाले परिवार में पैदा हुए हरमीत ने 12 साल की कच्ची उम्र में दर्दनाक मंजर से साक्षात्कार किया है। बहेड़ी निवासी इस युवक का दायां हाथ तब आटा चक्की के पट्टों उलझ गया और आखिर में कंधे से ही पूरा हाथ काटना पड़ा। जब एक हाथ से ताली नहीं बज सकती तो फिर जटिल काम कैसे होंगे? सवाल के पीछे संघर्ष था तो संघर्षों में ही जवाब। बस इसी जवाब के आगे बुलंद होते गए हौंसले ने आज युवक की तकदीर बदल डाली है। दसवीं तक एक हाथ से पढ़ाई की, बनारस की युवती से प्यार हुआ और फिर दांपत्य जीवन की शुरूआत के बाद हरमीत 19 साल की उम्र में हल्द्वानी आ गया।
परिवार संभालने, उसे चलाने के लिए विकलांगता को मात देने का यही सबसे कठिन और साहसिक वक्त था। एक अनजाने शहर में बसासत शुरू करने के बाद हरमीत ने मजदूरी कर एक रिक्शा खरीदा। बांए हाथ से हैंडल थामकर, दो पैरों का जोर पैडलों पर देकर उसने सड़कों में लोगों को ढोना शुरू किया। दिनभर परिश्रम से जब आमदनी अच्छी नहीं हुई तो ठीक एक साल बाद उसने शाम भी अपनी मेहनत के नाम की। अंडे की ठेली लगाकर घर चलने लायक पैसा अर्जित करने लगा। आज आठ साल हो गए इस युवक को हल्द्वानी में अपना कुनबा पालते-पालते। दो बेटे हैं, जिन्हें पढ़ा-लिखाकर वह अफसर बनाना चाहता है। सुबह आठ बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे तक रिक्शे से 200 रुपये और उसके बाद रात नौ बजे तक अंडे की ठेली में उसी एक हाथ से अंडे छिलकर कभी दो सौ तो कभी ढाई सौ रुपये कमा लेता है। यानि 13 घंटे के अथक परिश्रम में 400 से 450 रुपये की रोजाना आमदनी। आज विकलांग दिवस है। कहते हैं ‘विकलांगता’ अभिशाप नहीं होती। वाकई यह बात हरमीत की हिम्मत खुदबखुद बयां करती है।

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