उत्तराखंड की बेहतरी को रिवेन्यू एक्ट 18 जरूरी

Nainital Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
नैनीताल। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उत्तराखंड के बेहतर भविष्य के लिए यहां भी रेवेन्यू एक्ट के सेक्शन 18 को लागू करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि यदि यह एक्ट प्रदेश में लागू हो जाएगा तो फिर कोई भी व्यक्ति कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकता। फिर चाहे वह बाहरी हो या स्थानीय। इसके तहत विशेष परिस्थितियों में कृषि भूमि खरीदने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी। हिमाचल के 25 जनवरी 1971 को अस्तित्व में आने के साथ ही इस एक्ट को लागू कर दिया गया था।
यहां काशीपुर हाऊस में अपनी समधन कुंवर रानी मंजरी देवी की मृत्यु पर शोक संवेदना व्यक्त करने आए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी से मुलाकात कर उन्हें सेक्शन 18 के बावत जानकारी देकर उत्तराखंड में इसे लागू किए जाने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के निर्माण के पीछे उसकी सभ्यता, संस्कृति, भाषा, परिवेश के संरक्षण की मूल भावना छिपी रहती है। सभ्यता तथा संस्कृति से विहीन राज्य धीरे-धीरे रसातल की ओर जाने लगता है और आत्माविहीन राज्य होकर रह जाता है। इसलिए सत्तासीन सरकारों को विकास के साथ-साथ इनके संरक्षण की भी पहल करनी चाहिए।
श्री सिंह ने कहा कि उत्तराखंड पहाड़, पानी, जलवायु के दृष्टिकोण से समृद्ध है। दूरगामी सोच के साथ इनका सदुपयोग कर विकास की बेहतर शुरुआत की जा सकती है। हिमाचल में उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सदुपयोग के साथ, बिजली, पानी, सड़क, बागवानी और बैमौसमी सब्जी आदि की पहल की। इसी कारण आज वहां प्रति व्यक्ति आय 40 हजार रुपये प्रतिवर्ष पहुंच चुकी है। इस दौरान उन्होंने उन्होंने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की तारीफ भी की।
एफडीआई के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर कांग्रेस चर्चा को तैयार है। सिंह ने कहा कि उनका पहाड़ों से करीबी रिश्ता है। वह हिमाचल की तरह उत्तराखंड में भी विकास चाहते हैं। इसके लिए वह अपने स्तर से भी हर संभव प्रयास करेंगे।
हिमाचल में कांग्रेस की जीत का दावा
हिमाचल में चुनाव बावत पूछताछ पर उन्होेंने कहा कि सभी प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीनों में बंद हो चुका है। 20 दिसंबर को मतगणना के बाद विजेताओं की घोषणा की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल में सरकार कांग्रेस की बनेगी। पार्टी से लोगों को निष्कासित किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी का विरोध करने वालों के खिलाफ संगठन को अनुशासनात्मक पहल के लिए संस्तुति की थी।
पड़ोसी राज्य से सीख लें तो बच जाए राज्य
हिमाचल के 25 जनवरी 1971 को अस्तित्व में आने के साथ ही सेक्शन 18 को लागू कर दिया गया था। यही वजह है कि आज हिमाचल प्रदेश विकास के साथ-साथ अपने भविष्य और अपनी धरती को बचाए हुए है। जबकि, उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या ही यह है कि यहां पहाड़ तो पहाड़ तराई की उपजाऊ जमीन को बचाना असंभव सा हो गया है। उत्तराखंड को छोड़कर देश के सभी पहाड़ी राज्यों में रेवेन्यू एक्ट का सेक्शन 18 लागू है।

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