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तीन साल में ही आउटडेटेड हुए स्पेसर्स

Nainital

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। प्लानिंग के बिना पैसा खर्चना। यही तो है इस राज्य की खासियत। सरकार के बिजली महकमे को ही ले लीजिए। तारों को शार्टसर्किट से बचाने और उन्हें 15 से 20 इंच की दूरी पर बांधने के लिए तीन वर्ष पूर्व जिन लोहे के स्पेसर्स का प्रयोग किया गया था उसे कम समय में ही विभाग आउटडेटेड घोषित करने जा रहा है। स्पेसर्स को उतारकर अब तारों की सीलिंग की जा रही है। ताकि आपस में चिपकने पर भी तार जलने न पाएं। यानि इस नई तकनीक के चलते कम समय में ही स्पेसर्स पर खर्च धन की बर्बादी हुई है।
हाई वोल्टेज लाइन के तारों को इस तरह से बांधने की जरूरत नहीं होती, लेकिल लो वोल्टेज लाइन में जोड़े गए एल्यूमिनियनम के एक-दो या चार तारों को एक दूसरे से दूरी पर रखना पड़ता है। क्योंकि तेज हवा चलने पर तार आपस में टकराते हैं और शार्टसर्किट के कारण तारों के जलकर एक स्थान की बिजली आपूर्ति बाधित करने की समस्या पैदा होती है। तीन साल पहले उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने तारों के बीच दूरी को बांधने के लिए लोहे के स्पेसर्स लगाने का काम शुरू किया था। पूरे पहाड़ में आने वाले दिनों में एलटी लाइनों में सिलिंग होनी है और हल्द्वानी में इसकी शुरूआत हो चुकी है। अब तक राजपुरा वाले एरिया में सिलिंग का कार्य हुआ है।
सिलिंग को तकनीकी भाषा में एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) कहा गया है। तारों की सीलिंग के वक्त इन स्पेसर्स को निकालना जरूरी है और उसके बाद इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती। यूपीसीएल ने हल्द्वानी में ही स्पेसर्स पर लाखों रुपये की धनराशि खर्ची है। पूरा काम ठेकेदारी पर हुआ। इन्हें लगाने के बाद आंधी-तूफान के वक्त शार्टसर्किट के मामलों में भी कमी आई मगर तीन साल के भीतर ही इन्हें लाइनों से उतारने की नौबत आ गई है। अब खर्चा गया पैसा तो वापस मिलेगा नहीं। दूरगामी परिणामों को न देखने का यह नायाब नमूना है। अब सीलिंग में उसी तरह पैसे खर्चे होंगे, जैसे स्पेसर्स में हुए थे।
इंसेट
क्या है स्पेसर्स
बिजली लाइन में तीन से चार तार होते हैं। इन्हें एक-दूसरे से 15 से 20 इंच की दूरी पर रखना पड़ता है। यदि इन्हें बांध दिया जाए तो फिर हवा के झोंके में तार आपस में नहीं टकरा पाते। लोहे के करीब एक से डेढ़ मीटर लंबे और एक स्थान पर दर्जनों की संख्या में स्पेसर्स तारों में लगे हैं।

इंसेट
बिजली लाइन की सिलिंग के लिए इन्हें उतारना पड़ता है। सीलिंग ज्यादा बेहतर है। क्योंकि सीलिंग के बाद तार आपस में जुड़ने से बचेंगे और बिजली चोरी भी रुकेगी। -एसके तिवारी, ईई, यूपीसीएल नगर/ग्रामीण खंड हल्द्वानी।
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