जानवरों के लिए इंसानियत की अनपढ़ डाक्टर

Nainital Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। ज्ञान और अनुभव दोनों के भिन्न अर्थ हैं। कहते हैं ज्ञान के बिना कोई भी अनुभव असंभव है, मगर मोहनी साह का अनुभव ही उनका ज्ञान है। पहाड़ में बेजुबान पशुओं की अनपढ़ डाक्टर हैं मोहनी। वो पहाड़ जहां इंसानों के लिए तक डाक्टर नहीं मिलते। 40 साल से जानवरों से भावनात्मक जुड़ाव ने इस वृद्धा को प्रसव की डिलीवरी का ऐसा अनुभव दिया कि उन्हें चार गांव पशु दाई के नाम से जानते हैं। 75 की उम्र है और शिकन बिलकुल नहीं। पशु को प्रसव पीड़ा हो तो वक्त की परवाह नहीं रहती। चाहे जितना भी दूर जाना पड़े, रात-दिन तैयार। बुलवा आया और चल पढ़ती हैं। जानवरों के लिए इंसानियत के इसी रिश्ते का ही परिणाम है कि आज भी लोग पशु को पीड़ा होने पर डाक्टर से पहले उनके पास जाते हैं।
मोहनी अब तक दो हजार से अधिक पशुओं का सफल प्रसव करा चुकी हैं। गंगोलीहाट के हाट गांव की इस महिला के पास कोई डिग्री नहीं। सिर्फ पांचवीं कक्षा तक का ज्ञान उनके पास है। जानवरों की प्रसव पीड़ा और खामोश जुबान में छिपे दर्द को मोहनी ने बचपन से देखा है। उसी बचपन ने इस अनपढ़ को दर्द के इलाज की प्रेरणा देने के साथ रास्ता दिखाया इंसानियत, प्यार और अपनेपन का। जब भी गांव में किसी पशु को प्रसव का दर्द उठता तो वह उसके पास चली जाती। उसे सहलाती, ममता की छांव देती। इस लगाव ने उनका पशु पीड़ा खत्म करने का अनुभव बढ़ाया। मोहनी के हाथ आज भी प्रसव पीड़ित जानवर की नाजुक स्थिति होने पर उसे ठीक कर देते हैं। गर्भ में बच्चा अगर टेड़ा है तो मोहनी का हाथ उसे सीधा कर जानवर को आराम देता है। यह ऐसा काम है जिसे देख कुशल डाक्टरों के भी हाथ कांप जाते हैं।
40 के इस सफर ने अनपढ़ डाक्टर को एक कुशल डाक्टर बनाया है। हाट गांव के अलावा रावलगांव, हनेरा, कुंजनपुर गांव से पशु की बेचैनी बढ़ने और उसे दर्द उठने पर मोहनी को बुलाकर ले जाते हैं। जबकि इन गांवों से पशु अस्पताल सिर्फ तीन किलोमीटर दूर पड़ता है और वहां डाक्टर भी है। मोहनी के हाथों का जादू कहेंगे कि उन्हें देखते ही बेजुबान डाक्टर खुद पीड़ा भूल जाता है। रात में इंसानों के लिए डाक्टर मिले न मिले, जानवरों को उनकी मोहनी जरूर मिल जाती हैं। पहाड़ के इन गांवों में अब भी पशु अस्पताल का नंबर मोहनी के बाद आता है।
इंसेट
पशु प्रेम हो तो अनुभव कठिन नहीं

मोहनी साह कहती हैं कि उन्हें यह अनुभव विरासत में नहीं मिला। जानवरों को अपनेपन की जरूरत होती है। हम इंसानों की पीड़ा महसूस करते हैं, लेकिन पशु की नहीं। यदि पशु प्रेम हो तो ऐसे अनुभव खुदबखुद आते हैं। मोहनी के पति नाथ लाल साह कांग्रेसी नेता हैं और बेटा देवराज साह, घनश्याम साह दुकानदारी से घर चलाते हैं। मोहनी कहती हैं कि जब तक सांस रहेगी पशुओं का प्यार से उपचार करूंगी।

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