जर्मनी तकनीक पर कुमाऊं में बन रही पहली सड़क

Nainital Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। सड़क बनने पर न घंटों ट्रैफिक बंद होने का झंझट और पानी पड़ने से सड़क टूटने का डर। जर्मनी तकनीकी माइक्रोसर्फेसिंग पद्घति। इस तकनीकी से कुमाऊं की पहली सड़क का निर्माण कालाढूंगी रोड पर शुरू हुआ। माइक्रोसर्फेसिंग एक कोल्ड मिक्स टेक्नालाजी है। माइक्रोसर्फेसिंग तकनीकी से बनी सड़क को न तो बरसाती पानी से टूटने का खतरा है साथ ही सड़क बनने के बाद घंटों बंद करने की जरूरत नहीं होती और एक घंटे बाद ही इस पर ट्रैफिक शुरू हो जाता है।
नोएडा की लोमास स्लरीटैक कंपनी को हल्द्वानी में कालाढूंगी रोड के अलावा रामपुर रोड पर दो किलोमीटर और सितारगंज रोड बनाने का ठेका मिला है। कंपनी के निदेशक दिनेश मोहन बताते हैं कि जर्मनी तकनीकी पर हिंदुस्तान में पहली बार वर्ष 2001 में दिल्ली के पृथ्वीराज मार्ग का निर्माण कराया गया जिस पर सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने छह वर्ष तक सर्वे के बाद इस कार्य की संस्तुति की। वर्ष 2008 से दिल्ली पीडब्ल्यूडी द्वारा इसी पद्घति से सड़क नवीनीकरण कार्य कराए जा रहे हैं। इसी आधार पर उत्तराखंड में प्रयोग बतौर वर्ष 2007-08 में माइक्रोसर्फेसिंग का कार्य देहरादून में वीआईपी मार्ग ईसी रोड व सुभाष मार्ग पर कराया गया जो कि पांच साल तक गड्ढामुक्त रहा। उन्होंने बताया कि माइक्रोसर्फेसिंग एक क्वीक सेटिंग सिस्टम द्वारा कोल्ड मिक्स, ग्रीन व क्लीन टेक्नालाजी है। इसमें पानी सीमेंट, मोडीफाइड पोलीमर इमरसन, एडीटयू के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है। शहरों में सड़कों का नवीनीकरण कार्यों में यह उपयोगी इसलिए साबित हो रही है क्यों कि इस कार्य की थिकनैंस केवल पांच एमएम से आठ एमएम तक होने के कारण मार्ग की ऊंचाई नहीं बढ़ती जिससे मेनहोल कवर व शोल्डर, सेंट्रल वर्ज आदि उठाने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने बताया कि उनका जर्मनी कंपनी से समझौता है तथा सड़क निर्माण कार्य भी जर्मनी कंपनी के माइक्रासर्फेसिंग तकनीकी विशेषज्ञ आर्नव की देखरेख में हो रहा है। इस प्रक्रिया से बनने वाली सड़क के निर्माण के समय रोलर नहीं चलाया जाता जिसके कारण कार्य बहुत अधिक रफ दिखाई देती है तथा ज्वाइंट पर मोटाई कुछ अधिक दिखाई देती है। राइडिंग क्वालिटी चार से छह माह के अंदर सुधरने के बाद यह सड़क कम से चार से छह साल तक टिकाऊ रहती है तथा खर्चा भी हाटमिक्स से कम आता है।
- माइक्रोसर्फेसिंग सड़कों के रखरखाव के लिए वायु व ध्वनि प्रदूषण मुक्त प्रक्रिया है।
- ऊर्जा संरक्षण के लिए उत्तम वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
- आधुनिक तकनीक में उत्तम तकनीक है।
- इस कार्य के बाद मार्ग में पोरोसिटी बहुत कम होती है जिससे वर्षा के मौसम में पानी अंदर सतह के नीचे की ओर नहीं जाने देता जिससे पैच व पोट होल्स नहीं हो पाते।

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