सूखी नहर ने खंडित की छठ पूजा की परंपरा

Nainital Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। पूर्वांचल के प्रसिद्ध पर्व छठ पूजा में सूर्यास्त के वक्त अर्घ्य देने से पहले पानी में खड़े होकर मन्नतें मांगने की परंपरा सोमवार को सूखी नहर ने खंडित कर दी। हल्द्वानी में छठ पूजा के 18 वर्षों के लंबे सफर में ऐसा पहली बार हुआ है जब ऐन वक्त पर नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। अपने अराध्य देव से मन्नतें मांगने से पहले पूर्वांचल के लोग सिंचाई विभाग से पानी देने की मन्नत करते रहे, पर नहर कवरिंग के नरक ने इस पूजा की शुरूआत में ही बेड़ा गर्क कर दिया।
दीपावली के बाद शुरू होने वाली छठ पूजा का मुहूर्त सोमवार को था। डूबते सूरज को अर्घ्य देने के बाद ही पूजा प्रारंभ की जाती है और उससे पहले लोग बहते हुए पानी के बीचोंबीच खड़े होकर ईश्वर का स्मरण करते हुए मन्नत मांगते हैं। परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से करीब आधा घंटा पहले यह प्रक्रिया शुरू होती है। छठ पूजा सेवा समिति ने सिंचाई विभाग को पहले भी सूचना दी थी। पांच बजे सैकड़ों लोग रामपुर रोड स्थित छठ पूजा स्थल में एकत्र हुए, लेकिन नहर में सिवाय पत्थर और कूड़े के कुछ नहीं था।
समिति के पदाधिकारियों ने सिंचाई विभाग के अफसरोें से पानी छोड़ने का निवेदन भी किया, पर क्रियाशाला से आगे नहर के ऊपर स्लैब डालने का कार्य होने की वजह से पानी नहीं दिया गया। ठीक 5.25 बजे सूरज अस्त होने को था और तब जाकर नहर में पानी का प्रवाह दिखाई दिया। लोगों ने फिर सिर्फ अर्घ्य देकर पूजा शुरू की और मन्नतें नहीं मांग सके। इससे लोगों में भारी गुस्सा दिखाई दिया। हालांकि अब मंगलवार सुबह सूर्योदय के समय इस परंपरा को निभाया जाएगा, लेकिन शुरूआत में ही आए इस व्यवधान से लोग खुश नहीं। छठ पूजा समिति के अध्यक्ष कृष्णा साह, संयुक्त सचिव छोटे लाल का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ, जब नहर में पूजा के दिन पानी नहीं दिया गया। जबकि सिंचाई विभाग से एक हफ्ता पूर्व ही पूजा के दिन नहर में पानी चालू रखने का निवेदन किया गया था।
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छठ पूजा की विभाग को पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। सोमवार को अपराह्न डेढ़ बजे पूजा के लिए पानी दिए जाने की बात की गई। स्लैब डालते समय पानी छोड़ पाना संभव नहीं हो पाता, पर फिर भी सूर्यास्त तक नहर में पानी दे दिया गया। -सीएस अधिकारी, एसडीओ सिंचाई खंड हल्द्वानी।


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मंडी सभापति ने किया शुभारंभ
साल में एक बार होने वाली छठ पूजा का सोमवार को मुख्य अतिथि मंडी सभापति सुमित हृदयेश ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के लोग जिस उल्लास के साथ यह पर्व मनाते हैं, वह संस्कृति के प्रति लगाव का संदेश है। कालाढूंगी के विधायक बंशीधर भगत भी छठ पूजा स्थल पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पूर्वांचल के लोगों की बसासत के बाद यह पूजा देवभूमि के त्यौहारों की श्रृंखला का हिस्सा बन गई है। कार्यक्रम में पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगड़वाल, छठ पूजा समिति के संरक्षक जसवंत सिंह, अध्यक्ष कृष्णा साह, उपाध्यक्ष शंकर सिंह, उपसचिव प्रभा साह, सचिव सुरेश भगत, कोषाध्यक्ष नारायण शर्मा समेत कई लोग मौजूद थे। अकेले हल्द्वानी में पूर्वांचल के करीब 15 हजार लोग रहते हैं। सारी रात पूजास्थल में भजन-कीर्तनों का दौर चला। पूजास्थल को विशेष ढंग से सजाया गया है। मंगलवार सुबह सूर्योदय के बाद ही पूजा संपन्न होगी और व्रत टूटेगा।
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महत्व कुछ ऐसा
छठ पूजा का पूर्वांचली समाज में विशेष महत्व है। संतान की लंबी आयु या फिर संतान प्राप्ति के लिए पूजा होती है। लोग इसके अलावा भी अपने अराध्य देवता से मन्नतें मांगते हैं। रामपुर रोड में बने छठ पूजास्थल में 1998 से पूजा शुरू हुई थी। उससे पहले लोग किसी एक जगह पर सामूहिक रूप से पूजा करते थे।

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ये हैं पूजा के मंगलगान
‘छठी मैया तू पीपली अटरिया लौट चली पहर आय’, ‘सूरज बाबा के बगिया में नीबू तुड़े चलली छठी मैया’, ‘छठी मां की बेटी चंद्रमा बेटी चली ससुराल, उन कर आमा देयली जीरा धोइझा गमगत चार’, ‘चार अइखंडा के पोखरवा जल से भरी लेइहुनह सूरज बाबा धोती पोखरवा करूं स्नान,’ ‘करूं छठइय से अरजिया पोखरा करूं स्नान,’ ‘छोटी मोटी मालिन बिटिया फुलवा लेइयहा हो बिटिया अरहवा के बेरा’ आदि।

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