पर्यावरण समर्थित विकास जरूरी : प्रो. मुजम्मिल

Nainital Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
नैनीताल। एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मो. मुजम्मिल ने कहा कि अर्थिक एवं स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से किसी भी देश के विकास की अवधारणा के लिए उसमें पर्यावरण को भी शामिल किया जाना जरूरी है। उन्होेंने सामाजिक न्याय के साथ पर्यावरण समर्थित विकास की वकालत की।
डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में कुमाऊं विवि में तृतीय जीडी तिवारी स्मृति व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. मुजम्मिल ने भारतीय संघीय व्यवस्था में परिवर्तित होती राजस्व व्यवस्था पर केंद्रित व्याख्यान में कहा कि भारत में भी आस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्राजील और कनाडा की तरह संघीय व्यवस्था है। जहां सरकारें केंद्र और राज्य विभिन्न स्तरों पर विकास कार्य करती हैं। पूर्व में केंद्र से राज्यों को दी जाने वाली धनराशि में 80 फीसदी जनसंख्या का आधार था, जो अब 25 फीसदी है। इसी प्रकार क्षेत्र का भी आधार नियत है। इस आधार के अनुरूप 100 रुपये के अनुरूप 19.67 रुपये उत्तर प्रदेश और 1.20 रुपये उत्तराखंड को प्राप्त होते हैं। उन्होंने वित्तीय नीति निर्माण के लिए राष्ट्रेत्तर एवं राष्ट्रीय शक्तियों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विडंबनावश भारत में दोनों पक्षों के दबाव से वित्तीय नीति निर्माण होता है।
पद्मश्री प्रो. शेखर पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार का राजकोषीय एवं राजनैतिक दृष्टिकोण समानांतर नहीं होना चाहिए। उन्होेंने कहा कि 1977 तक केंद्र समेत राज्य में कांग्रेसी शासन तक केंद्र से राज्य को धन प्रवाह ठीक था लेकिन क्षेत्रीय दलों के उभरने के बाद जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। प्रो. वीके तिवारी, प्रो. बीएल साह आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान डा. रितेश साह, प्रो. सीसी पंत, प्रो. इंदु पाठक, प्रो. उमा पालनी, प्रो. पीएस बिष्ट, प्रो. अजय अरोरा, प्रो. मुन्नी पडलिया, प्रो. नीता बोरा आदि थे। संचालन डा. दिव्या जोशी उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में प्रो.पाठक की पुस्तक अंडरस्टेंडिंग उत्तराखंड एनं इंट्रोडक्शन टू द सोसाइटी, हिस्ट्री एंड कल्चर आफ द रीजन का विमोचन भी किया गया।

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