अपर सचिव वित्त की ताजपोशी को लेकर गरमाई राजनीति

Nainital Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। वाणिज्य कर विभाग के कोटे से अपर सचिव वित्त के पद पर ताजपोशी को लेकर एक बार फिर से राजनीति गरमा गई है। विभाग की वरिष्ठता सूची को दरकिनार करते हुए सरकार एक अफसर पर मेहरबान है। चहेते अफसर की आनन-फानन में डीपीसी ही नहीं बल्कि बैक डेट में मुख्यमंत्री कार्यालय से फाइल पर संस्तुति तक हो गई है। सरकार की इस कोशिश में कोई पेच नहीं फंसा तो जल्द ही चहेते अफसर को अपर सचिव वित्त का दायित्व मिल सकता है।
वाणिज्य कर विभाग के कोटे से शासन में अपर सचिव वित्त का अस्थायी पद सृजित है। सरकार पिछले आठ सालों से इस पद को एक-एक साल के लिए आगे बढ़ाते आई है। विभागीय कोटे से अपर सचिव वित्त चंद्रशेखर सेमवाल के 31 मई 2011 को सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली है। सेमवाल की सेवानिवृत्ति के बाद विभाग में वरिष्ठता एवं सेवा अभिलेखों के आधार पर तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर (प्रशासन मुख्यालय) वीके सक्सेना इसके हकदार थे। वित्त विभाग ने उन्हें अपर सचिव वित्त बनाए जाने के लिए 24 अगस्त 2011 को शासन को फाइल भेजी। इसके लिए 22 फरवरी 2012 को डीपीसी भी हो गई। लेकिन डीपीसी के बाद यह फाइल शासन में अटक गई। अपर सचिव वित्त पद की निरंतरता की अवधि 29 फरवरी को खत्म हो गई, जबकि वीके सक्सेना को अपर सचिव वित्त बनाए जाने की फाइल पांच मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के समक्ष पेश की गई। तत्कालीन सरकार ने विभागीय कोटे से अपर सचिव वित्त का पद बढ़ाने के लिए संस्तुति नहीं दी, लिहाजा वीके सक्सेना को अपर सचिव वित्त की जगह न्यायाधीश ट्रिब्यूनल बना दिया गया।
वीके सक्सेना ने 14 मार्च को ट्रिब्यूनल न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करने के साथ शासन को अवगत कराया कि अपर सचिव वित्त का पद 2012 में सृजित होने की स्थिति में वह सबसे पहले इसके हकदार होंगे। इसी शर्त पर उन्होंने ट्र्िब्यूनल न्यायाधीश का कार्यभार संभाला। शासन में अब कुछ लोग चहेते अफसर को अपर सचिव वित्त बनाना चाहते हैं। बताया जाता है कि चहेते अफसर की डीपीसी कराकर उन्हें अपर सचिव वित्त बनाने के लिए बैक डेट से मुख्यमंत्री से संस्तुति भी करा ली गई है। शासन में यह मामला चर्चा का विषय बना है। सूत्राें का कहना है कि जिस अफसर को अपर सचिव वित्त बनाया जाना है, वह 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

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