किवाड़ से लटका मिला वार्ड ब्वाय का शव

Nainital Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। संदिग्ध परिस्थितियों में राजकीय मेडिकल कालेज के टाइप टू के क्वार्टर में वार्ड ब्वाय का शव बृहस्पतिवार सुबह किवाड़ के सहारे लटका मिला है। पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने छानबीन के बाद शव कब्जे में ले लिया। वार्ड ब्वाय के क्वार्टर के मुख्य दरवाजे की चिटकनी अंदर से बंद थी लेकिन बालकनी का दरवाजा खुला था। पुलिस गंभीरता से छानबीन कर रही है।
ओखलकांडा ब्लाक के गांव मल्ली पोखरी निवासी वार्ड ब्वाय कमल ढोलगाई (23) पुत्र नारायण दत्त ढोलगाई यहां मेडिकल कालेज के टाइप टू की फर्स्ट फ्लोर के क्वार्टर में बडे़ भाई चंद्र बल्लभ ढोलगाई के साथ रहता था। कमल ने आउटसोर्सिंग से 2006 में सुशीला तिवारी अस्पताल में बतौर वार्ड ब्वाय नौकरी ज्वाइन की थी। कमल के बड़े भाई चंद्र बल्लभ कालेज के ही प्राचार्य के आफिस में अटेंडेंट हैं। मेडिकल पुलिस के अनुसार 16 अक्टूबर को चंद्र बल्लभ की पत्नी दो बच्चों और छोटे देवर घनश्याम को लेकर अपने गांव चली गई। 21 अक्टूबर को चंद्र बल्लभ भी घर चले गए। कमल क्वार्टर में अकेला था। बृहस्पतिवार सुबह कमल को सब्जी लेकर अपने गांव जाना था। चौकी प्रभारी बीएस पागंती ने बताया कि आज सुबह करीब पौने आठ बजे चंद्र बल्लभ की पत्नी ने कमल के मोबाइल पर फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। बाद में चंद्र बल्लभ की पत्नी ने क्वार्टर के नीचे परिचित महिला को फोन किया। महिला ने ऊपर आकर मुख्य दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाई, क्वार्टर के बालकनी के दरवाजे में पत्थर मारे लेकिन कमल नहीं उठा। हल्ला होने पर आसपास के क्वार्टरों के लोगों के साथ सुरक्षा कर्मी भी मौके पर पहुंच गए। सीढ़ी के सहारे पड़ोसी बालकनी तक पहुंचे। बालकनी के दरवाजे में धक्का मारा तो दरवाजे की किवाड़ फट से खुल गई। अंदर जाकर देखा तो कमल का शव बेडरूम के दरवाजे की किवाड़ के सहारे लटका था। सूचना पर चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे। कमल की गर्दन चुनरी के फंदे में, उसके पैरों के पंजे फर्श पर टिके थे और चुनरी किवाड़ की चिटकनी में फंसी थी। बाद में सीओ प्रमेंद्र सिंह डोबाल, कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल ने भी मौके पहुंचकर मामले की गहनता से छानबीन की। पुलिस ने शाम को पोस्टमार्टम कराकर शव उसके परिजनों को सौंप दिया।


हल्द्वानी। मेडिकल कालेज प्राचार्य आफिस में अटेंडेंट के पद पर कार्यरत चंद्र बल्लभ ढोलगाई ने बताया कि 27 अक्टूबर को उसकी सास का वार्षिक श्राद्ध है। कमल को आज सब्जी लेकर गांव आना था। फोन करने के कुछ देर बाद कमल की मौत की सूचना मिलने से पूरा परिवार सदमे में है। चंद्र बल्लभ ने भाई की मौत संदिग्ध हालातों में होने की बात कही है। कमल सरल स्वभाव का था।

कमल की मौत के अनसुलझे सवाल
- बालकनी का दरवाजा कैसे खुला रह गया
- कमल के पैरों में खुरेंच के निशान कैसे बने
- कमल को साथ ले जाने वाला दोस्त कौन था
- टेबिल पर कलम, अखबार तो कलम का कैप बिस्तर पर कैसे पहुंचा
- क्या किवाड़ से लटकने, पैर फर्श पर लगने से मौत हो सकती है
- हत्या और आत्महत्या के बीच कई पेंच फंसे है

नायलॉन की होने से लटक गई चुनरी
हल्द्वानी। मेडिकल चौकी प्रभारी बीएस पागंती का कहना है कि कमल के गले में जो चुनरी फंसी थी, वह चुनरी नायलॉन की थी। इसलिए कमल के गले में फंदा लगाने के बाद चुनरी लटक गई और कमल के दोनों पैरों के पंजे फर्श से टिक गए। प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सही स्थिति की जानकारी होगी।

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