डेढ़ सौ स्कूलों में सिलेंडर बम के साये में पढ़ रहे बच्चे

Nainital Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। जिले के 151 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जिंदगी खतरे में हैं। इनमें से अधिकांश स्कूल ऐसे हैं जिनके क्लासरूम में गैस सिलेंडर पर मिड-डे-मिल बनाया जा रहा है। थोड़ी सी लापरवाही से गैस सिलेंडर लीक होने पर उसमें आग लगने पर अगर विस्फोट हो गया तो स्कूल में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन शिक्षा विभाग इससे बेपरवाह बना हुआ है।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों को मिड-डे-मील योजना के अंतर्गत मध्याह्न भोजन दिया जा रहा है। यह योजना शिक्षा विभाग के प्राइमरी स्कूलों में वर्ष 2002 में और जूनियर हाईस्कूलों में वर्ष 2008 में लागू की गई। मगर अभी तक जिले के 151 स्कूलों में किचन के अभाव में क्लासरूम में मध्याह्न भोजन गैस सिलेंडर पर बनाया जा रहा है। गैस सिलेंडर पर जहां मध्याह्न भोजन बनाया जाता है, वहीं कुछ फासले पर या उससे सटे कमरों में बच्चों की क्लासें लग रही हैं। इसमें सबसे अधिक संख्या जूनियर हाईस्कूलों की है जहां मध्याह्न भोजन बनाने के लिए किचन नहीं है। सुरक्षा के उपाय भी रामभरोसे ही हैं। इसी तरह जिन स्कूलों में टीनशेड की किचन बनी हैं उनमें गंदगी का अंबार रहता है जिनकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर क्षेत्र के बद्रीपुरा, तुलसी नगर, समतायोग आश्रम गली स्कूल, चौक बाजार, रेलवे बाजार और इंद्रानगर स्कूल तक में किचिन नहीं हैं।
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केस एक-
बद्रीपुरा में दो मंजिलें पर राजकीय जूनियर हाईस्कूल संचालित हो रहा है। इसमें 48 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल में किचन नहीं बनी है इस कारण क्लासरूम के बराबर भोजन माता द्वारा मध्याह्न भोजन पक रहा था। हेड टीचर मुमताज बानो का कहना था कि विभाग से किचन के लिए अभी पैसा नहीं मिला है। भोजन माता तनुजा मेलकानी के मुताबिक मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए करीब डेढ़ घंटे गैस का इस्तेमाल करना पड़ता है।
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केस दो -
बद्रीपुरा प्राइमरी स्कूल में टीन का किचन तो बना था मगर उसमें भोजन नहीं बनाया जाता। इस स्कूल में भी क्लासरूम के बराबर में भोजन बनाया जा रहा है। हालांकि पूछने पर स्कूल की टीचरों ने दावा किया कि टीनशेड में भोजन पकाया जाता है मगर टीनशेड में गंदगी का अंबार लगा था।
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केस तीन-
समता योग आश्रम गली में किराए के जर्जर भवन में संचालित प्राथमिक पाठशाला में बिजली, पानी और शौचालय आदि किसी की सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं इस स्कूल में भी किचन के अभाव में क्लासरूम में मध्याह्न भोजन बनाया जाता है। शिक्षिका जया बिष्ट का कहना था कि शौचालय न होने के कारण बच्चों को परेशानी होती है मगर क्या करें।
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जेल रोड स्थित प्राइमरी स्कूल में किचन तो था मगर मध्याह्न भोजन के समय जमीन पर बैठे भोजन करते दिखाई दिए। हालांकि भोजन अच्छा बना था। बच्चे छोले- चावल बड़े चाव से खाते मिले।
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स्कूल का हाल देख चौंकी नगर शिक्षा अधिकारी
हल्द्वानी। बद्रीपुरा स्कूल परिसर में ही नगर शिक्षा अधिकारी का कार्यालय है लेकिन दोनों स्कूलों में मिड- डे- मिल क्लास रूमों में क्यों बनाया जा रहा है। शुक्रवार को नगर शिक्षा अधिकारी का काम देख रहीं उपखंड शिक्षा अधिकारी चंपा भौर्याल से इस बारे में पूछा गया तो वह चौंक गई तथा तुरंत दोनों स्कूलों का निरीक्षण कर शिक्षिकाओं को क्लासरूम में भोजन बनवाने पर फटकार लगाई।
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जिले में 955 प्राइमरी स्कूलों में से 113 स्कूलों में अभी किचन नहीं बन सके हैं। जबकि 547 स्कूलों में टीनशेड में चल रहे हैं इनमें से 295 स्कूलों में किचन के स्थान पर पक्के किचन बनाने के लिए बजट रिलीज किया गया है। इसी तरह 438 जूनियर हाईस्कूलों में से 38 स्कूलों में किचन हैं। सभी स्कूलों को निर्देश हैं कि किचन के अभाव में क्लासरूम में भोजन न बनाया जाए, इसके लिए खुले स्थान का इस्तेमाल किया जाए। अगर किसी स्कूल में क्लासरूम में भोजन बनता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
आरसी पुरोहित, जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक), नैनीताल

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