दो घंटे की लीला को चार घंटे का मेकअप

Nainital Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। रामलीला मंचन के दौरान सजधज कर अभिनय करने वाले पात्र सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन पात्रों को सजाने और उन्हें मंच में अभिनय करने के लिए तैयार करने वालों की ओर शायद ही किसी की नजर रहती हो। रामलीला के पात्रों को तैयार करना एक विशेष कला तो है ही साथ ही यह कार्य काफी मेहनत का भी है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि मात्र दो घंटे की लीला का मंचन करने वाले पात्रों का मेकअप करने में पूरे चार घंटे का समय लगता है।
रामलीला मैदान में इन दिनों रामलीला का मंचन हो रहा है। यहां दिन और रात्रि की लीला का मंचन होता है। रामलीला कमेटी से जुड़े लोगों के मुताबिक कुमाऊं ही नहीं दिल्ली को छोड़कर शेष उत्तर भारत में दिन की रामलीला वाली यह अकेली रामलीला है, जहां दिन की लीला का भी मंचन किया जाता है। दिन की लीला का मंचन कराने की तैयारी दोपहर एक बजे शुरू हो जाती है। मेकअप मैन नरेश गोस्वामी, पुष्कर जोशी, अजय राजपूत और विश्व प्रकाश ‘गब्बर’ पिछले 25 सालों से कलाकारों के मेकअप की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। मेकअप मैन ने बताया कि रामलीला के पात्रों का मेकअप करते समय पहले मुद्रासन नामक पदार्थ से उनकी फेस मेकिंग की जाती है। मुद्रासन सूखने के बाद गालों, आंखों, ठोढ़ी पर रोज लगाया जाता है। उसके बाद पाउडर से फिनिंशिंग दी जाती है। हल्के गोंद के सहारे चेहरे में चमक लाने के लिए चमकी का प्रयोग किया जाता है। अंत में खड़े तिलक वाले पात्रों के माथे पर लाल रंग का ‘श्री’ और तिरछे तिलक वाले पात्रों के माथे पर पीले चंदन का त्रिकुंड बनाया जाता है। अंत में पात्रों को वस्त्र, बाल, मुकुट, मालाएं आदि पहनाए जाते हैं।

पहले ऐसे करते थे मेकअप
पूर्व में देवीदत्त पांडे और अशोक टंडन रामलीला कमेटी के मेकअप मैन के रूप में प्रसिद्ध थे। उन दिनों रोज आदि की व्यवस्था नहीं होने से जिंक आक्साइड को गोले के तेल में मिलाया जाता था। उसमें लाल रंग मिलाकर उसे गुलाबी बनाया जाता था। श्याम वर्ण के कलाकारों के लिए जिंक आक्साइड, गोले का तेल और नील मिलाकर श्याम रंग बनाया जाता था।

एक पात्र के मेकअप में लगते हैं बीस मिनट
यहां रामलीला मैदान में कलाकारों का मेकअप दोपहर एक बजे से शुरू हो जाता है। सायं साढ़े चार से साढ़े छह बजे तक लीला का मंचन होता है। एक बजे से कलाकारों का मेकअप करने पर वह सायं साढ़े चार बजे तक तैयार हो पाते हैं। तभी लीला का मंचन किया जाता है। मेकअप रूम में करीब चार घंटे का समय लगता है।

‘श्री’ लगाने के बाद वही नाम
कमेटी से जुड़े प्रमोद भट्ट, गोविंद बगड्वाल और संतोष कबड्वाल बताते हैं कि रामलीला के पात्र को ‘श्री’ लगाने के बाद उसे उसी रूप में जाना जाता है। राम परिवार के पात्र ‘श्री’ लगाने के बाद आराध्य की तरह माने जाते हैं। इसलिए पात्र को ‘श्री’ रामलीला शुरू होने से कुछ ही समय पहले लगाते हैं।

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