बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
TRY NOW

तीनपानी में जंगलात ने अवैध निर्माण तोड़े

Nainital Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
हल्द्वानी। तीनपानी जंगल में हो रहे अतिक्रमण को लेकर जंगलात के अधिकारियों की नींद टूटी। शनिवार को दलबल के साथ पहुंची तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टीम ने दस कच्चे-पक्के निर्माण ध्वस्त कर दिए। इस दौरान वन कर्मियों और अतिक्रमणकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई। कब्जा हटाये जाने से नाराज लोगों ने वन कर्मियों का घेराव भी किया।
विज्ञापन

तीनपानी में उत्तराखंड मुक्त विवि के पास जंगल में अंदर-अंदर सालों से कब्जा हो रहा था। इसको लेकर विभाग अनजाना बना रहा। एक के बाद एक झोपड़ी पड़ती रही। इसमें कुछ ने पक्का निर्माण भी कर लिया था। यह कब्जे करीब पच्चीस साल से हो रहे थे। तारबाड़ कर आगे के जंगल के घेरने की कोशिश शुरू हो गई थी। अमर उजाला ने इन अवैध कब्जों को प्रमुखता से उठाया। इन कब्जों से जंगलात की जमीन पर संकट गहरा गया था। दूसरी जगह भी कब्जे होने की आशंका थी। इसके बाद विभागीय अधिकारी हरकत में आये। उप प्रभागीय वनाधिकारी आरसी कांडपाल और वन क्षेत्राधिकारी सीएल आर्य भारी दलबल के साथ करीब 11 कब्जे वाली जगह पर पहुंचा। टीम देख अतिक्रमणकारी बिफर उठे। कब्जा हटाने के लिए समय देने की मांग करते हुए वन कर्मियों की टीम को घेर लिया। इस दौरान कर्मियों और अतिक्रमणकारियों के बीच जमकर तकरार भी हुई। बाद में अतिरिक्त टीम और अधिकारियों के आने के बाद विभाग ने विरोध के बीच ही झोपड़ी को तोड़ना शुरू कर दिया। आरओ सीएल आर्य ने बताया कि कब्जा हटाने के बाद राजस्व जमीन के पास सीमा के लिए जेसीबी से खाई खोद दी गई है, जिससे अतिक्रमणकारी भविष्य में ऐसी हरकत दुबारा न करे। टीम में जगदीश चंद दानी, कैलास कपिल, शांति प्रसाद, किसन सिंह बिष्ट, हरीश नेगी, आशुतोष आर्य, रणजीत सिंह नेगी, भूपेंद्र सिंह आदि शामिल थे।


खेत भी बना लिये थे
हल्द्वानी। अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हो गये थे कि उन्होंने सिर छुपाने के लिए घर बनाने के बाद जंगल में खेत बनाना भी शुरू कर दिया था। कुछ जगहों पर धान लगा दिया गया था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फसल काटने भर की छूट दी गई है। फिर इस जगह पर जंगलात कब्जा लेकर पौध रोपण करेगा। इसके लिए सर्वे आदि की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है।

बेशकीमती जमीन
हल्द्वानी। तीनपानी में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। ओपन यूनिवर्सिटी बनने और कई संस्थानों के प्रस्तावित होने से इलाके में जमीन के लिए कोई भी व्यक्ति कोई भी कीमत देने को तैयार है। ऐसे में तीनपानी के जंगल में कब्जा करना सबसे आसान और सस्ता अतिक्रमणकारियों को लग रहा है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X