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13 सिलेंडरों की गैस हजम कर गए धंधेबाज

Nainital Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। महंगाई और ऊपर से धांधली। सुनवाई कहीं नहीं। उपभोक्ता कहां जाएं? पूरे कुमाऊं में रसोईगैस के काले कारोबार ने जड़ें जमा रखी हैं और सिलेंडरों की गैस हजम करने वालोें को अफसरों की शह मिलने से धंधेबाज उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहे हैं। हल्द्वानी इस गोरखधंधे का गढ़ बन गया है। तीन दिन बाद एक बार फिर यहां घटतौली पकड़ी गई है और वह भी पूरे 13 सिलेंडरों में। पांच सौ ग्राम से एक किलोग्राम गैस गायब। सभी सिलेंडरों को पूर्ति विभाग ने जब्त कर लिया है। ये खेल पूर्ति और बांट माप विभाग की संयुक्त चेकिंग में पकड़ में आया।
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हल्द्वानी में गैस सिलेंडरों में घटतौली का काला कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। तीन दिन पूर्व देवलचौड़ में पांच सिलेंडरों में 26.1 किलोग्राम गैस कम मिली थी। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर ठेकेदार की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। उस मामले के सामने आने के बावजूद इंडेन गैस को बांटने वाले ठेकेदार का अधिकारी कुछ नहीं बिगाड़ सके और न ही किसी तरह की कार्रवाई हुई। खबर के बाद पूर्ति विभाग खुद को सक्रिय दिखाते हुए बांट माप विभाग के साथ घटतौली पकड़ने निकला। बरेली रोड अब्दुल्ला बिल्डिंग के पास टेंपो में लदे 40 सिलेंडर तोले गए तो दो सिलेंडरों में एक किलोग्राम गैस गायब मिली। बाकी 11 सिलेंडरों में से किसी में 500 ग्राम तो किसी में 800 ग्राम गैस कम है।

जिला पूर्ति अधिकारी राहुल शर्मा ने गैस एजेंसी के प्रबंधक तथा ठेकेदार को मौके पर बुलाकर लताड़ लगाई। उन्होंने घटतौली के सभी सिलेंडरों को शीशमहल गैस गोदाम भिजवा दिया है। घटतौली में ठेकेदार की संदिग्ध भूमिका से पूर्ति विभाग भी इंकार नहीं कर रहा। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि गैस वाहनों की चेकिंग के लिए हल्द्वानी के सभी पूर्ति निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। चेकिंग टीम में क्षेत्रीय पूर्ति अधिकारी विजय जोशी के अलावा डीडी लोहनी, बाट माप निरीक्षक एलएम पंत शामिल थे।

एग्रीमेंट किसी के नाम पर, संचालक कोई और
एग्रीमेंट किसी के नाम का और मैदान में कोई और। हल्द्वानी इंडेन गैस एजेंसी के अधीन आने वाले कुल 40 हजार उपभोक्ताओं को गैस बांटने का काम केएमवीएन ने ठेके पर दिया है। एग्रीमेंट संतोष अधिकारी के नाम पर है और वितरण की कमान गणेश गुणवंत नामक व्यक्ति के हाथों। नियमों की धज्जियां उड़ा रहे ठेकेदार से केएमवीएन के अधिकारी वाकिफ हैं, सबके मुंह पर ताला लगा है। जबकि नियमानुसार जिस व्यक्ति के नाम पर एग्रीमेंट हुआ है वह किसी दूसरे को ठेका नहीं दे सकता। निगम और ठेकेदार के बीच आए तीसरे व्यक्ति की भूमिका क्या होगी, समझा जा सकता है।

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