आचार्यों को शिक्षा मित्र के रूप में नियुक्ति देने में धांधली

Nainital Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
भीमताल। शिक्षा आचार्यों को शिक्षा मित्र के रूप में स्कूलों में नियुक्तियां देने के मामले में शासनादेशों के उल्लंघन का मामला उजागर हुआ है। मामला संज्ञान में आने पर मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) अनिल भोज ने अपर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक को मामले की समीक्षा करने तथा समीक्षा होने तक शिक्षा आचार्यों को शिक्षा मित्र के रूप में कार्यभार ग्रहण न करने देने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2007-08 में कई ईजीएस (एजुकेशन गारंटी केंद्र) बंद करने के निर्देश दिए थे। ईजीएस केंद्रों में शिक्षा आचार्य नियुक्त थे। सरकार के इस आदेश के बाद जिले के चार शिक्षा आचार्यों ने शिक्षा मित्र के रूप में नियुक्त करने के संबंध में न्यायालय में वाद दायर किया। न्यायालय ने चारों शिक्षा आचार्यों को बतौर शिक्षा मित्र नियुक्त करने संबंधी निर्देश शिक्षा अधिकारियों को दिए। बताया जाता है कि तत्कालीन अपर जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) जगमोहन सोनी ने चार के स्थान पर 46 शिक्षा आचार्यों को शिक्षा मित्र के रूप में नियुक्ति दे दी। यही नहीं नियुक्ति देने में भी शासनादेशों का खुला उल्लंघन किया गया। शासनादेश के तहत शिक्षा आचार्यों की नियुक्ति अति दुर्गम और एकल विद्यालयों में होनी चाहिए थी लेकिन अधिकांश शिक्षा आचार्यों को सुगम स्थानों अथवा मोटर मार्ग से लगे स्कूलों में बैक डेट में नियुक्तियां दे दी गई। बताते चलें कि पिछले दिनों सोनी का यहां से स्थानांतरण हो चुका है।
मामला संज्ञान में आने पर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हंसादत्त भट्ट और जिला मंत्री इंद्र सिंह रावत ने मुख्य शिक्षा अधिकारी अनिल भोज से वार्ता की और तत्कालीन अपर जिला शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी द्वारा की गई नियुक्तियों का विरोध किया। मुख्य शिक्षा अधिकारी अनिल भोज ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तत्कालीन अपर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने बगैर उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के ही शिक्षा आचार्यों को नियुक्तियां दी हैं। अपर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक आरसी पुरोहित को मामले की समीक्षा करने और समीक्षा रिपोर्ट आने तक शिक्षा आचार्यों के नए विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

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