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विधायकों से बड़े प्रतिनिधि और चेले चपाटे

Nainital Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। सियासी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाती रही हैं। संगठन में शायद इसका असर होता हो पर आम जनता के बीच कई बार यह अनुशासन अराजकता के रूप में सामने आ रहा है। सत्ता की हनक में छुटभय्ये नेता ऐसा काम कर रहे हैं कि लगता है कि सांसद या विधायक से बड़े उनके चेले चपाटे और प्रतिनिधि हो गए हैं। ये लोग नियम कानूनों को ही ठेंगा नहीं दिखा रहे बल्कि सत्ता का रौब गाठकर पुलिस-प्रशासन को अनावश्यक दबाव में भी ले रहे हैं। इन हालातों में पुलिस का मनोबल गिर रहा है। उसे स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका नहीं मिल रहा है।
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इमानदारी से ड्यूटी करने वाले पुलिस अफसर भी अब कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं, न जाने कौन किसका प्रतिनिधि निकल जाए। पिछले दिनों कुछ ऐसे मामलों में पुलिस के सख्ती दिखाने पर ऐसे लोगों ने बड़ा बखेड़ा कर दिया। हाल ही में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसना पुलिस को भारी पड़ा। पुलिस अफसर हो या कोई सिपाही, गाड़ी रोकते ही ये छुटभय्ये नेता आंखें तरेरते हुए गाड़ी से बाहर निकलते हैं। गाड़ी के कागज दिखाने को कहना तो इनकी शान के खिलाफ है। पुलिस कर्मियों पर रौब गाठते हुए ये कहते हैं ‘मैं विधायक प्रतिनिधि हूं, दोस्त हूं’। दबाव बनाने को इनके बोलने का ढंग भी बदल जाता है। तू-तड़ाक के साथ ये पेश आते हैं। पुलिस कर्मी जरा भी भारी पड़े तो फोन पकड़ाकर सीधे नेता जी या उनके प्रतिनिधि से बात करने को कहते हैं। हफ्ते भर में हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल में चेकिंग प्वाइंट पर विधायकों के ये तथाकथित प्रतिनिधि बवाल कर चुके हैं।


केस-एक
21 अगस्त की देर रात की घटना है। कालटैक्स के पास स्कार्पियो में सवार नशे में धुत युवकों की गाड़ी पुलिस ने रोकी लेकिन युवकों ने गालीगलौज कर गाड़ी दौड़ा दी। वायरलेस पर सूचना के बाद गाड़ी आगे रोक ली गई। यहां युवकों ने एक पुलिस अधिकारी से दुर्व्यवहार किया। छानबीन हुई तो एक युवक ने स्वयं को विधायक का प्रतिनिधि बताया। गाड़ी भी उसकी ही थी। पुलिस कर्मियों ने तथाकथित विधायक प्रतिनिधि और उसके दोस्तों का मेडिकल कराने की बात कही तो प्रतिनिधि ने नेताओं को फोन कर वहां बुला लिया। बाद में माफी मांगने पर अफसरों ने प्रतिनिधि और उसके दोस्तों को छोड़ दिया।

केस-दो
22 अगस्त की शाम का वाकया है। दरोगा जी टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे। तीन सवारी होने पर दरोगा ने बाइक रोकी तो बाइक सवार युवक राशन पानी लेकर दरोगा के ऊपर चढ़ गया। बोला तुम मुझे, जानते नहीं हो, मै विधायक प्रतिनिधि के परिवार से हूं, तुमने गाड़ी रोकने की हिम्मत कैसे की। इतना कहकर युवक ने पुलिस के एक बड़े अधिकारी का नाम लेकर दरोगा को फोन थमा दिया और बोला बात करो। इस रवैये पर दरोगा को गुस्सा बहुत आया, उसने फोन पर बात नहीं की और गाड़ी का चालान कर दिया। दरोगा ने इस प्रकरण में अपने एक अधिकारी से बात की और सर ऐसे कैसे हम काम करे।

केस-तीन
यह मामला एक सप्ताह पुराना है। दिन में रोडवेज चौराहे के पास भीड़भाड़ थी। गलत साइड से एक कार वाले ने अपनी गाड़ी निकालने का प्रयास किया तो ट्र्रैफिक पुलिस कर्मी ने कार वाले को रोक लिया। इस पर कार सवार उतारा और सीधे पुलिस कर्मी से गालीगलौज कर दी। कार सवार ने कांग्रेसी कहते हुये कहा कि आयंदा ध्यान रखना, मेरी गाड़ी देखकर मुझे रोकना मत। कार सवार के रवैये से पुलिस कर्मी सकपका गया और उसने कार वाले को जाने दिया।



फोटो सहित


मैने यहां कोई अपना प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया है। यदि कोई मेरा प्रतिनिधि बनकर प्रशासनिक या पुलिस अधिकारियों पर रौब गाठता है या उनके साथ अभद्रता करता है तो यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसी किसी भी शिकायत की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और आरोप सही होने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वैसे भी कांग्रेस संगठन इस प्रकार के व्यवहार की कतई इजाजत नहीं देता।
-डा. इंदिरा हृदयेश, वित्त मंत्री, उत्तराखंड सरकार

मैने किसी को भी अपना प्रतिनिधि नहीं बनाया है। जनप्रतिनिधियों के नाम पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों, कर्मियों या किसी भी व्यक्ति पर रौब गाठने और अनावश्यक दबाव बनाने की कानून किसी को भी इजाजत नहीं देता। ऐसी कोई भी शिकायत मिलने पर मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वैसे भी मैं तो यह मानता हूं कि सांसद हो या विधायक, किसी को भी प्रतिनिधि नियुक्त करने की जरूरत नहीं होना चाहिए, जनता से बराबर उनका संपर्क बना रहना चाहिए।
-बंशीधर भगत, विधायक, कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र

मेरा कोई प्रतिनिधि नहीं है। मेरा प्रतिनिधि बनकर यदि कोई जनता या अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाता है तो मुझे तत्काल इसकी सूचना दे। मामले में तत्काल आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। एसओजी से अभद्रता जैसी घटना की मुझे कोई जानकारी नहीं है। मेरा कोई भी कार्यकर्ता या समर्थक ऐसा काम नहीं कर सकता।
-हरीश चंद्र दुर्गापाल, श्रम मंत्री, उत्तराखंड सरकार

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