जरा बचके, सेहत पर भारी पड़ेगा प्रदूषण

Nainital Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। सावधान! प्रदूषण आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। जिस तेजी से शहर में कंक्रीट के ढांचों के साथ जनसंख्या और वाहनों का दबाव बढ़ा है उसी गति से आबोहवा में जहर घुला है। ग्रीन सिटी नाम से मशहूर हल्द्वानी की हवा अब शुद्ध नहीं रही। धूल के कण कई गंभीर बीमारियों के जनक होते हैं और इन्हीं की मात्रा हवा में अधिक है। वायु प्रदूषण अपनी स्वीकार्य सीमा को लांघ चुका है। पिछले सात महीनों में एक बार भी ऐसा नहीं हुआ जब प्रदूषण स्वीकार्य सीमा से नीचे आया हो।
वायु में 10 माइक्रोन से छोटे धूल या अन्य कण रेस्पाइरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलर मैटर (आरएसपीएम) और 10 माइक्रोन से ऊपर के कण सस्पेंडेड पार्टिकुल मैटर (एसपीएम) में मापे जाते है। शहर में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रति माह मानिटरिंग के बाद जो आंकड़े पेश किए गए हैं वह चौंकाते हैं। आरएसपीएम का स्तर 100 और एसपीएम का स्तर 200 से ऊपर बढ़ने पर वायु में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा मानी जाती है। जनवरी से लेकर 31 जुलाई तक एक भी महीना ऐसा नहीं है जब वायु में जहर घोल रहे कणों का प्रभाव कम हुआ हो। रोजाना सुबह, दिन और रात में प्रदूषण की स्थिति रिकार्ड होती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि शहर के तेजी से विस्तार और आबादी का घनत्व फैलने के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई है। फरवरी माह में प्रदूषण की मात्रा सबसे ज्यादा आंकी गई है। वायु प्रदूषण को चिकित्सक मानव स्वास्थ के लिए बेहद खतरनाक मानते हैं। धूल के कण और हानिकारक गैसों के प्रभाव से फेफड़ों का कैंसर, हृदय संबंधी रोग, ब्लड प्रेशर, श्वास, दमा आदि रोगों की संभावनाएं बढ़ती हैं।

ये है वायु प्रदूषण का हाल
माह आरएसपीएम एसपीएम
जनवरी 159.75 313.64
फरवरी 229.59 449.82
मार्च 176.67 318.77
अप्रैल 129.49 295.8
मई 151.82 331.10
जून 154.34 355.70
जुलाई 123.59 221.55
(स्वीकार्य सीमा आरएसपीएम 100 और एसपीएम 200 है)

कैसे करें वायु प्रदूषण से बचाव
-घर से निकलने पर मुंह में मास्क पहनें
-आंखों के बचाव को सनग्लास जरूरी
-बाइक पर चलते समय बंद हेलमेट पहनें
-बाजार से घर पहुंचते ही मुंह अच्छे से धोएं
-शहर में कार के शीशों को खोलकर न रखें

चिकित्सकों का कहना
वायु प्रदूषण का बढ़ना शहर की सेहत के लिए खतरनाक है। सतर्कता न बरतने पर गंभीर बीमारियां घर कर सकती हैं। सबसे पहले आंख, नाक, मुंह का बचाव होना चाहिए। क्योंकि नाक, मुंह से धूल के कण फेफड़ों तक पहुंचते हैं। -डा. नीलांबर भट्ट, वरिष्ठ फिजीशियन।

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