विश्वास पर विज्ञान ने लगाई मोहर

Nainital Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। पहाड़ की गाय देखने में भले छोटी हो, लेकिन उसके गुण का कोई सानी नहीं है। यह बात हमारे पूर्वज और बड़े लोग अपने अनुभव के ज्ञान के आधार पर कहते थे। सालों पुराने इस विश्वास पर विज्ञान ने भी मोहर लगा दी है। पंत विश्वविद्यालय के पटवाडांगर स्थित इंस्टीट्यूट आफ बायोटैक लैब में पहाड़ की बद्रीगाय समेत तीन और प्रजाति की गायों के दूृध, खून और यूरीन पर शोध किया गया था, इसमें बद्रीगाय में सबसे ज्यादा न्यूट्रीशन वैल्यू और प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का गुण मिला है।
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पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पटवाडांगर स्थित इंस्टीट्यूट आफ बायोटैक लैब में शोध हुआ है। शोध के तहत साहीवाल, क्रास ब्रीड, गुजरात की गिर गाय और पहाड़ के गिर गाय के दूध, खून के अलावा यूरीन की अलग-अलग जांच की गई। दूध में वैज्ञानिकों को ए-2 जीन मिला है। रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक अंकिता जोशी कहती हैं कि यह एक खास तरह का जीन होता है, जो सबसे ज्यादा न्यूट्रीशन वैल्यू होने की पुष्टि करता है। इससे प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होती है। बायोटैक लैब के निदेशक डा. आरएस चौहान कहते हैं कि इसके बाद गौ मूत्र का टेस्ट करने का फैसला किया गया। इसके तहत चूहों और खरगोश की पहले टीएलसी, डीएलसी और हीमोग्लोबीन की जांच की गई, इसके बाद खरगोश, चूहों को बांटकर सभी गायों का गौ मूत्र दिया गया। कुछ दिनों बाद फिर से इनकी जांच की गई, तो उन चूहों में ज्यादा टीएलसी, डीएलसी और हीमोग्लोबीन की मात्रा मिली, जिन्हें बद्रीगाय का गौमूत्र दिया गया था।
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