जनता का पैसा जाए कबाड़ में अफसरों को क्या?

Nainital Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। सात करोड़ रुपये की भव्य इमारत में 74 दुकानों का एयर कंडीशंड कांप्लेक्स। एक-एक दुकान में एसी। लेकिन चालू अवस्था में एक भी नहीं। 40 लाख रुपये खर्च हुए ठंडी हवा छोड़ने का तामझाम खरीदने में। लेकिन सब कबाड़ बन गया। जंक लगी भारी भरकम मशीनों में मकड़ियों का घर है तो दुकानों में एसी के छेद मकड़जाल से बंद हो चुके हैं। लाखों रुपये की बर्बादी के ये निशान कांप्लेक्स के अंधेरे कोनों में आज भी कैद हैं। सवाल उठता है कि आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?
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गेट-वे आफ कुमाऊं यानि हल्द्वानी शहर के केंद्र में स्थित कालाढुंगी चौराहे के समीप 2004-05 में पर्यटन विभाग ने जो बिल्डिंग बनाई उसके प्रथम तल को शॉपिंग कांप्लेक्स का रूप दिया गया। 74 दुकानों में एसी लगाए गए। क्योंकि शर्तें यही थी कि कांप्लेक्स एयर कंडीशंड रहेगा। बकायदा दिल्ली से ‘डायनाफ्लो’ कंपनी के तीन एसी प्लांट खरीदकर कांप्लेक्स में जमा दिए गए। एसी भी लगे और प्लांट भी। लेकिन संचालन अब तक नहीं हुआ। एक प्लांट की कीमत करीब साढ़े 13 लाख रुपये है। ऊपर से एसी के रेट अलग से। शॉपिंग कांप्लेक्स की तीन दुकानों में रखे गए भारी भरकम प्लांट इतने बदतर हो चुके हैं कि अगर अब इन्हें चलाया भी गया तो उससे पूर्व रिपेयरिंग करनी पड़ेगी।
हर प्लांट के आगे कूड़े का ढेर बिखरा पड़ा है। प्लांट की जालियां फट गई हैं। एक बार भी लाखों रुपये मूल्य के इन प्लांटों का इस्तेमाल नहीं हुआ। एक प्लांट से 25 एसी जुड़े हैं। इस विशालकाय बिल्डिंग का कर्ताधर्ता शुरूआत से ही कुमाऊं मंडल विकास निगम रहा है और अब भी संपूर्ण कांप्लेक्स की चाबी निगम के पास है। कांप्लेक्स के अंधेरे कोनों में बर्बादी का यह तमाशा पिछले आठ वर्ष से देखा जा रहा है। एसी की इन मशीनों के आने के बावजूद निगम इन्हें जुड़वा नहीं सका। रोचक बात यह है कि जो दुकानें कांप्लेक्स में चल रही हैं उनके मालिकों ने अपने निजी एसी लगा लिए हैं। एसी के प्लांट तो कबाड़ बन चुके। पर देरसबेर इनका संचालन होगा या नहीं इस सवाल का जवाब निगम के आला अधिकारी ही दे सकते हैं।
बिना हवा के किराया वसूली की तैयारी
एसी की हवा तो दी नहीं। उसका किराया जरूर वसूल होगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम जो न करे वो अच्छा। सूत्रों की मानें तो इस बार दुकानों के किराए में निगम ने 12 प्रतिशत की वृद्धि की है। इस बढ़ोत्तरी में चौकीदार का खर्च, साफसफाई और एसी का खर्च भी जोड़ा गया है। एसी सिर्फ शोपीस हैं। यानि हवा मिले न मिले किराया चुकता करना पड़ेगा।

बिजली नियंत्रण कक्ष के हाल
शॉपिंग कांप्लेक्स का बिजली नियंत्रण कक्ष कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। नियंत्रण कक्ष से संपूर्ण भवन की बिजली सप्लाई होती है। नियंत्रण कक्ष के इर्द-गिर्द कूड़े के ढेर के साथ पानी फैला रहता है। देखरेख के लिए वहां कोई नहीं। तार कई जगह से झूल रहे हैं और यही अनदेखी निगम के लिए भारी पड़ सकती है।

एमडी को पता ही नहीं
शॉपिंग कांप्लेक्स के भीतर लाखों रुपये के एसी प्लांट रखे गए हैं इसकी केएमवीएन के प्रबंध निदेशक दीपक रावत को जानकारी तक नहीं। उनसे जब इस बारे में सवाल किया गया तो वह पहले तो प्लांट का नाम सुनकर आश्चर्य में पड़ गए। लेकिन फिर बोले कि किन कारणों से एसी चालू नहीं हुए। इसकी जानकारी ली जाएगी।
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