क्योंकि देश अभी गुलाम है...

Nainital Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। हम उन गोरों से लड़े तो लड़े। लेकिन किसके लिए। भ्रष्ट नौकरशाह, अफसर, नेताओं के लिए। इस देश को बर्बादी की तरफ धकेलने के लिए? आज अगर ये हड्डियां बूढ़ी न होती तो भारत मां की खातिर एक और लड़ाई लड़ता। क्योंकि देश अभी गुलाम है। सन् 1947 से पहले अंग्रेजों की तो आज नौकरशाह-नेताओं की गुलामी। कल 65 साल की आजादी का जश्न मनाएंगे हम। लेकिन मैं बूढ़ा भारत की जवानी को सिर्फ ये संदेश दूंगा कि जो नारा 47 से पहले अंग्रेजों के लिए था आज वही भ्रष्टचारियों के लिए लगाओ। ‘भ्रष्टाचारियो भारत छोड़ो’...युवा लड़ेंगे तब सही मायने में देश की आजादी होगी। यह कहना है हल्द्वानी के फ्रीडम फाइटर शिवराज सिंह का।
1947 से पहले और उसके बाद इन 65 वर्षों में हिंदुस्तान का राजकाज देख शिवराज की आंखें आज भी भर आती हैं। 1942 में 14 साल की कच्ची उम्र में अंग्रेजों से मोर्चा लेने वाले इस शख्स ने तब अपने भविष्य की परवाह नहीं की थी। माथे पर चिंता थी तो देश की। जिसे तब अंग्रेजों ने गुलाम बना रखा था। शिवराज आंदोलन में कूदे पकड़े गए और फिर वही हुआ जो हर आंदोलनकारी के साथ होता था। नन्हे कंधों पर 19 कोड़े बरसे और 15 दिन जेल में बिताए। उन कोड़ों का दर्द आज भी इस बुजुर्ग के कंधों में है। लेकिन आंखें बार-बार, जार-जार रोती हैं हिंदुस्तान के वर्तमान को देख।
शिवराज कहते हैं कि आजादी के शुरूआती दौर में अच्छे नेता मिले तो हिंदुस्तान एक प्रगति के मार्ग की ओर बढ़ा। लेकिन फिर तो जैसे प्रगति के रास्ते पर अंधेरा ही पसर गया। देश को अदूरदर्शी सियासतदां मिले हैं और साथ में भ्रष्टाचारियों की फौज। गरीब आज भी गरीब है। किसी आफिस में जाएं तो काम के दाम मांगे जाते हैं। मजदूर वर्ग अंग्रेजों के दौर से भी बदतर उत्पीड़न झेल रहा है। यह किसी भी मायने में आजादी नहीं। 65 वर्ष की स्वतंत्रता के मौके पर एक भेंट में ये बुजुर्ग सेनानी सिर्फ यही बोले कि फिर उसी जमीनी लड़ाई की जरूरत है देश को जो गोरों को खदेड़ने के लिए लड़ी गई थी। क्योंकि भ्रष्टाचारी देश की रीढ़ तोड़ रहे हैं।

स्वहित साध रहे अन्ना, बाबा
समाजसेवी अन्ना हजारे और योगगुरु बाबा रामदेव। कौन नहीं जानता इन हस्तियों को। मगर शिवराज दोनों के आंदोलन को देश नहीं बल्कि स्वहित के लिए मानते हैं। कहते हैं कि बाबा योग तक सीमित रहें तो उनके लिए सही है। अन्ना हजारे ने राजनीतिक दल बनाने का जो फैसला लिया है उससे उनकी महत्वाकांक्षाएं साफ जाहिर होती हैं।

शहीदों के नाम पर जलाएंगे दीप
राम सिंह आजाद, नाथ साह, टीका सिंह, नर सिंह। ये वो नाम हैं जिन्हें देखकर ही शिवराज के भीतर 1942 में बाल अवस्था में जोश जागा था आंदोलन का। मूल रूप से लमगड़ा के रहने वाले इस सेनानी का परिवार आज यहां अमरावती कालोनी में रहता है। शिवराज कहते हैं कि 15 अगस्त को एक दीप जलाऊंगा स्वतंत्रता आंदोलन के उन शहीदों के नाम पर। बस यही मेरे लिए आजादी की खुशी होगी।

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