एक मंच से गूंजी आरक्षण की आवाज

Nainital Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। हजारों की भीड़ और एक मंच पर बुद्धिजीवियों का जमावड़ा। स्वर अनेक। लेकिन जुबां पर सिर्फ एक शब्द। आरक्षण, आरक्षण, आरक्षण...। पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने के हाइकोर्ट के फैसले को लेकर अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की नाराजगी रविवार को ‘आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति’ के महासम्मेलन में साफ दिखाई दी।
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राज्य स्तर के इस कार्यक्रम में भीड़ का कोई जवाब नहीं था। कर्मचारी, जनप्रतिनिधियों संग समाजसेवी और सामान्य लोग पूरे जोश के साथ आकर बोले आरक्षण यथावत रखवाने की मांग के लिए हर लड़ाई में आगे रहेंगे, अपनी आवाज बुलंद रखेंगे। संघर्ष समिति अनुसूचित जाति/जनजाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ है। श्यामा गार्डन में सुबह दस बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. उदितराज ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण खत्म होने से एससी, एसटी वर्ग के भविष्य के अवसर भी खत्म हो जाएंगे। संविधान में आरक्षण का प्रावधान है। न्यायालय के इस आदेश का सबसे बड़ा झटका कर्मचारियों को लगा है। जो वर्षों से पदोन्नत होने की आस लगाए हैं।
सरकार ने आज तक पदोन्नति नहीं दी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के साथ इन वर्गों के हर व्यक्ति को एकजुट होना पड़ेगा। अल्मोड़ा के सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि आरक्षण एससी/एसटी वर्ग का संवैधानिक अधिकार है। पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था पूर्ववत रखने के लिए संसद में मांग उठाई जाएगी। ये मुद्दा राजनीति का नहीं बल्कि आरक्षित वर्ग को उसका अधिकार देने का है। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास, पूर्व विधायक जोगा राम टम्टा, विधायक सरिता आर्य, पूर्व राज्य मंत्री खजान गुड्डू, अजय राजौर के अलावा बुद्धिजीवियों ने भी मंच से आरक्षण को यथावत रखने की वकालत की। संचालन हरीश चंद्र आर्य ने किया। करीब दो हजार से ज्यादा लोग सम्मेलन में आए हुए थे।
अब राजधानी में भरेंगे हुंकार
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने महासम्मेलन की सफलता के बाद एससी/एसटी वर्ग से ब्लाक स्तर तक आंदोलन चलाने का आह्वान किया है। समिति ने देहरादून में विशाल आंदोलन की भी रूपरेखा तय कर दी है। सितंबर अंतिम या फिर अक्तूबर प्रथम सप्ताह में राज्यभर से हजारों लोग राजधानी में हुंकार भरेंगे। ब्लाक और जिला कार्यकारिणयों से आवाज बुलंद रखने की अपील की गई।

आरक्षण के साथ कुछ अन्य मांगें
-बैकलाग पद तीन माह के भीतर भरे जाएं
-आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया तत्काल बंद हो
-जाति प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया सील की जाए
-विकास योजनाओं का धन शतप्रतिशत व्यय हो
-जिलों में एससी/एसटी वर्ग के लिए प्रशिक्षण केंद्र खुलें
-हर जिले में अंबेडकर बहुउद्देशीय भवन बनाए जाएं
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