...मेरे पास मां है

Nainital Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। सोलह साल तक मां से अलग रहने के बाद नैनीताल का सूरज भी अब बोल सकेगा ...मेरे पास मां है। सूरज अब ममता की छांव में अपने सपने पूरा करेगा। चार साल का था, जब उसकी मां गायब हो गई थी। सात महीने पहले जब पिता का निधन हुआ तो मां के मिलने की उम्मीद और धूमिल हो गई। लेकिन चेन्नई के हेल्पिन हैंड उद्वम करगल एनजीओ की जागरूकता और अमर उजाला की संवेदनशीलता के कारण सूरज को उसकी मां दीपा मिल गई। सूरज चेन्नई से अपनी मां को लेकर नैनीताल के लिए निकल पड़ा है। फोन पर हुई बातचीत में सूरज ने जीवन का सबसे अनमोल तोहफा देने वाले अमर उजाला को शुक्रिया कहा है।
सूरज के वनवास की कहानी कुछ इस तरह खत्म हुई। तीन मई दोपहर हल्द्वानी कोतवाली के पीएनटी नंबर पर चेन्नई के एनजीओ से फोन आया कि मल्ला गोरखपुर निवासी दीपा उर्फ दया पिछले 16 साल से चेन्नई में रह रही हैं। चेन्नई के हेल्पिन हैंड उद्वम करगल एनजीओ के संचालक से जानकारी लेने के बाद अमर उजाला ने चार मई के नैनीताल संस्करण में दीपा की दास्तान छापी। मल्लीताल निवासी सूरज शाह की गदरपुर निवासी बड़ी बहन ने अमर उजाला पढ़कर मां के जीवित होने की बात परिजनों को बताई। कटिंग लेकर छह अगस्त को सूरज यहां कोतवाली आया और छानबीन की। तीन दिन पूर्व सूरज बड़ी बहन के साथ चेन्नई के हेल्पिन हैंड उद्वम करगल एनजीओ के लोगों से मिला। इसके बाद उसकी अपनी मां से मुलाकात हुई। फोन पर हुई बातचीत में उसने बताया कि पिता के साथ मां की खिंची फोटो दिखे उसकी मां पति और बेटे को पहचान गई। दीपा ने अपनी बड़ी बेटी को भी तुरंत गले लगा लिया। सूरज ने बताया कि वह अपनी मां और बहन को लेकर मुंबई से नैनीताल के लिए चल पड़ा है। सोमवार शाम तक पहुंचने की बात कही है। इधर, दीपा के घर लौटकर आने पर ही वह 16 साल पहले चेन्नई कैसे पहुंची, इसकी जानकारी मिल सकेगी।

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