सुंदर हल्द्वानी का सपना तो उसी दिन टूट गया

Nainital Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। हल्द्वानी के भाग्य उसी दिन खराब हो गया था जब 1988 में स्थानीय नेताओं के दबाव में हल्द्वानी-काठगोदाम विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण स्थापित होने के बाद भंग हो गया। अगर विकास प्राधिकरण भंग न होता तो आज हमारा हल्द्वानी शायद उत्तराखंड का सबसे खूबसूरत शहर होता। कुमाऊं के प्रवेश द्वार यानी कि हल्द्वानी शहर में जनसंख्या का दबाव बढ़ेगा तथा पहाड़ के अधिकांश लोगों के रिहायशी इलाके के रूप में यही ा शहर विकसित होगा, इसको ध्यान में रख कर 24 साल पहले ही उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने विस्तृत कार्ययोजना को मूर्तरूप दे दिया था। अब तो यहां की आबोहवा के चलते दूसरे राज्यों के बाशिंदे भी हल्द्वानी में बसने लगे हैं।
शहर के साथ-साथ इससे सटे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुनियोजित ढंग से विकास हो सके तथा बड़े शहर की भांति यहां भी आवासीय भवन, व्यावसायिक कांप्लेक्स आदि का भवन निर्माण निर्धारित मानकों के आधार पर हो ताकि लोगों को भविष्य में किसी समस्या को झेलना न पड़े। इसी मकसद से उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के प्रयासों पर ही उत्तर प्रदेश शासन ने 11 नवंबर 1988 को हल्द्वानी-काठगोदाम विशेष विकास प्राधिकरण गठित करने की अधिसूचना जारी की थी। जिसमें नगर पालिका एरिया के अलावा तहसील के 16 गांवों को शामिल किया गया था। विकास प्राधिकरण गठित करने की अधिसूचना नगर विकास विभाग के तत्कालीन सचिव एसडी बग्गा की ओर से जारी की गई थी। इसके उपरांत नगर विकास सचिव एसडी बग्गा ने 4 फरवरी 1989 को विकास प्राधिकरण में संयुक्त सचिव के एक अस्थाई पद का सृजन तथा उस पर तैनाती का भी जीओ जारी किया था। शासन ने यह निर्देश दिए थे कि संयुक्त सचिव का पद उस समय तक बना रहेगा जब तक उक्त पद पर किसी प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की नियुक्ति न हो जाए। बाद में राज्यपाल की सहमति पर संयुक्त सचिव के पद पर एसी सिन्हा प्रभारी अधिकारी नगर पालिका की नियुक्ति कर दी गई।
इधर, विकास प्राधिकरण ने काम करना शुरू ही किया था कि ग्राम सभाओं की राजनीति करने वाले प्रधानों ने प्राधिकरण के विरोध में झंडा बुलंद कर दिया। इसे हवा देने का काम कुछ भू माफियाओं ने भी किया। इसमें कुछ राजनैतिक पार्टियों के नेता भी शामिल हो गए और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री तिवारी पर विकास प्राधिकरण खत्म करने को दबाव बनाया। परिणाम स्वरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई 1989 को विकास प्राधिकरण को खत्म कर दिया। इसके बाद तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर ओएन वैद्य ने शासनादेश के आधार पर 22 जुलाई 1989 को संयुक्त सचिव एसी सिन्हा को तत्काल प्रभाव से इस पद से कार्यमुक्त करते हुए प्रोजेक्ट मैनेजर कम अधिशासी अधिकारी नगर पालिका के पद पर ज्वाइन करने के आदेश जारी कर दिए। इसके बाद किसी नेता ने यहां विकास प्राधिकरण गठित ही नहीं होने दिया।
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एचकेडीए में शामिल किए गए थे 16 गांव
हल्द्वानी काठगोदाम विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में नगर पालिका एरिया के अलावा हल्द्वानी तहसील के ग्राम लोहरियासाल तल्ला, चूनपुर, लोहरियासाल मल्ला, छड़ायल नायक, छड़ायल सुयाल, छड़ायल नयाबाद, कुसुमखेड़ा, मुखानी, बमौरी तल्ली खाम, बिठौरिया नंबर एक, बिठौरिया नंबर दो, हरिपुर सुयाल, हरिपुर गांगू, दमुवाढूंगा खाम, हरि सिंह दिलीप सिंह और ब्यूरा को शामिल किया गया था।

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