मेडिकल कालेज में एमडीआर इलाज को झटका

Nainital Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज में टीबी से सौ गुना घातक बताये जा रहे एमडीआर की जांच और इलाज की संभावना नहीं है। संसाधन और बिल्ंिडग के तैयार नहीं हो पाने के कारण यहां के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग में इलाज शुरू नहीं हो सकेगा। रोगियों को इलाज के लिए देहरादून जाना पड़ेगा।
टीबी के कई खतरनाक रूप सामने आ चुका है। इसमें टीबी, एमडीआर, एक्सडीआर के अलावा टीडीआर है। हल्द्वानी के निजी चिकित्सालय में टीडीआर यानी टोटल ड्रग रेजिस्टेंस(कोई भी दवा काम नहीं करती है) तक के रोगी रिपोर्ट हो चुके हैं। पर सरकारी अस्पतालों में मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंस(एमडीआर) का इलाज शुरू होने की नौबत नहीं आ सकी है। पहले तय हुआ कि मेडिकल कालेज के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एमडीआर का इलाज शुरू किया जाए। इसको लेकर तैयारी भी शुरू हो गई। निरीक्षण आदि के बाद तय हुआ कि एमडीआर के रोगियों के लिए अलग वार्ड बनाया जायेगा, जहां सामान्य टीबी के रोगियों को नहीं रखा जाएगा। इसके अलावा जांच के लिए लैब बनाई जाए। पर मेडिकल कालेज प्रबंधन के रवैये और सरकारी तंत्र के चलते योजना पर पानी फिर गया है। जल्द यहां पर इलाज शुरू होने की संभावना नहीं है। टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. आरजी नौटियाल कहते हैं कि फिलहाल एमडीआर के रोगियों की जांच और शुरुआती इलाज देहरादून में होगा। इसके बाद रोगियों को कहां पर रखकर इलाज करना तय होगा। संसाधन की कमी के चलते यहां पर इलाज की सुविधा नहीं जुट सकी है।
लागत बढ़ी काम धेला भर नहीं
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी चिकित्सालय में करीब पांच साल सुपर स्पेशलिस्ट सेंटर (इंस्टीट्यूट आफ रेसपेटरी डिजीज रिसर्च) सेंटर करने की योजना बनाई गई है। इस केंद्र में लैब और शोध भी किया जाएगा। योजना पर करीब तीस करोड़ का बजट रखा गया। योजना पर अभी तक कोई भी अमल नहीं हुआ। कागजों की दौड़ जारी है, हाल में नये सिरे से प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें उसकी लागत 40 करोड़ पहुंच गई है।

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