मरीजों के इलाज में रोेड़ा बने एमआर

Nainital Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। सोबन सिंह जीना बेस एवं महिला अस्पताल में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) मरीजों के इलाज में बाधक बन गए हैं। दोनों ही अस्पतालों में अधिकतर विभागों की ओपीडी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का पूरा दखल है। ओपीडी में चिकित्सक मरीजों को देखने के बजाए दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के साथ दवा बेचने की डील करते हैं। डील पक्की होने के बाद मरीजों को अस्पताल के बजाए मेडिकल स्टोर से दवाएं लिखी जाती हैं।
सोबन सिंह जीना एवं महिला अस्पताल में सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलती है। दोनों अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं। अधिकतर ओपीडी में साढ़े दस बजे से पहले चिकित्सक नहीं बैठते हैं। चिकित्सकों के ओपीडी पहुंचने तक सैकड़ों मरीजों के पर्चे जमा हो जाते हैं। ओपीडी समय में दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के प्रवेश पर प्रतिबंध है। अस्पताल प्रशासन ने प्रत्येक ओपीडी के बाहर नोटिस भी चस्पा किया है।
अस्पताल प्रशासन की सख्ती के बावजूद अधिकतर ओपीडी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सुबह भी धमक जाते हैं। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ओपीडी में घंटों बैठकर दवा बेचने की डील करते हैं। इससे ओपीडी के बाहर लाइन के खड़े मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई ओपीडी में तो मरीजों के पर्चे चढ़ाने से लेकर दवा भी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ही लिखते हैं। मरीजों के पर्चे पर दवाएं अस्पताल के बजाए मेडिकल स्टोर से लिखी जाती हैं। इसके बाद भी मरीजों से ओपीडी में दवाओं की जांच कराने की सलाह दी जाती है, ताकि मेडिकल स्टोर संचालक संबंधित साल्ट की दूसरी कंपनी की दवा ना थमा दे। मरीजों के दवा चेक करवाने के बाद ही मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव संतुष्ट होते हैं।

ओपीडी में रोगियों को देखने के टाइम पर एमआर के प्रवेश पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी किसी ओपीडी में मरीज देखने के वक्त एमआर बैठते हैं तो औचक चेकिंग की जाएगी। एमआर पकड़े जाने पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डीसी भट्ट, प्रभारी सीएमएस, बेस अस्पताल

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