सिनेमा हालों में सांस लेना मुश्किल

Nainital Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। शहर के सिनेमा हालों की हालत खराब है। भीतर से लेकर बाहर तक गंदगी ही गंदगी। हल्द्वानी में सरगम, लक्ष्मी, नाहिद और प्रेम सिनेमा हाल हैं। हालों में प्रवेश करते ही पीक दान दर्शकों का स्वागत करते हैं। पीक दान वर्षों से साफ नहीं हुए हैं। इनसे उठने वाली दुर्गंध दर्शकों के हाल में बैठने तक दिमाग से नहीं निकल पाती है। हालों में दर्शकों की बैठने की कुर्सियां भी टूटी फूटी हैं। कुर्सियों से निकली कीलों से दर्शकों के कपड़े ही नहीं फटते बल्कि कील चुभने से जख्मी तक हो जाते हैं। फिल्म देखने के दौरान आपको सिनेमा हाल का शौचालय इस्तेमाल करना पड़ जाए तो गंदगी देकर आपको उल्टी आ सकती हैं। शौचालय से उठने वाली दुर्गंध आपका फिल्म देखने का मूड नहीं बल्कि तबीयत तक खराब कर सकती है। हल्द्वानी के सिनेमा हालों की शौचालयों की स्थिति सार्वजनिक शौचालयों से बदतर है। महिलाओं के लिए तो सबसे बड़ी दिक्कत हैं।
मनोरंजन कर विभाग के मानकों के मुताबिक सिनेमा हालों की बालकनी और फर्स्ट क्लास में पुरुष और महिला शौचालय अलग अलग होना अनिवार्य हैं। हल्द्वानी के चारों सिनेमा हालों की बालकनी और फर्स्ट क्लास में शौचालय तो बने हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल करना खुद को संक्रामक बीमारियों की चपेट में लाना है। अधिकतर हालों में पुरुष और महिला शौचालयों में संकेत चिन्ह नहीं बने हैं। कई बार पुरुष अनजाने में महिला शौचालयों में चले जाते हैं। अधिकतर हालों में महिला शौचालय के दरवाजे में अंदर से चिटकनी टूटी हैं। सिनेमा हालों के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है। कई शौचालयों में तो नल हीं नहीं हैं। नाहिद सिनेमा के शौचालय में तो लगा लटका है। इसी तरह सरगम सिनेमा हाल का शौचालय घास का मैदान बना है। हालांकि, प्रेम सिनेमा में सफाई व्यवस्था बाकी हालाें से ठीक है। नियमित सफाई नहीं होने से शौचालयों की सीटों पर में गंदगी बजबजाती है। सिनेमा हालों के शौचालय इस्तेमाल करने के लिए दर्शकों को नाक में रुमाल रखकर जाना पड़ता है। गंदगी देखने एवं सड़ांध दिमाग में चढ़ने से उल्टियां तक हो जाती हैं। मनोरंजन कर, स्वास्थ्य विभाग के अफसर सिनेमा हालों का निरीक्षण करने की तक जहमत नहीं उठाते हैं। बिजली गुल होने पर जनरेटर तो चलता है, लेकिन पंखे नहीं घूमते हैं। जनरेटरों से भी प्रदूषण होता है।

हाल में प्रत्येक शो खत्म होने के बाद शौचालय की सफाई होती है। शौचालयों में पानी की व्यवस्था है। फिल्म का इंटरवल होने के बाद दर्शक शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। कई बार पानी का नल खुला छोड़ने से टंकी खाली जाती है। - निहार अग्रवाल, प्रेम सिनेमा हाल संचालक

सिनेमा हालों में मानक के अनुरूप सुविधाएं होनी अनिवार्य हैं। खासकर, शौचालयों की साफ सफाई के प्रति लापरवाही दर्शकों के साथ खिलवाड़ है। सिनेमा हालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। सफाई एवं दूसरी व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। - उदयवीर सिंह राणा, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी

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