‘पनियाला’ बनाएगा बाघ के पंजों को पैना

Nainital Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। पहले निशाना, फिर छलांग और फिर पंजों की मजबूत पकड़ के साथ शिकार का काम तमाम। जंगल का राजा बाघ कुछ इसी तरह से अपना शिकार करता है। शिकार करने में बाघ का अहम हथियार पंजा ही साबित होता है। वन महकमे की माने तो बाघ अपने पंजे को धारदार बनाने के साथ बाकायदा इसकी सफाई करता है। इसके लिए जंगल के राजा को एक खास प्रजाति पनियाला का पेड़ पसंद होता है। टाइगर की इस पसंद को देखते हुए अब महकमा इस पेड़ की पौध को नर्सरी में तैयार करने के बाद जंगल में रोपण करने की तैयारी में है। हर बाघ का अपना इलाका होता है, जहां उसकी हुकूमत चलती हैै। दूसरे बाघों को अपना इलाका बताने के लिए वनराज पनियाला के पेड़ों पर एक खास निशान भी बनाता है।
मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एसके सिंह कहते हैं कि बात केवल निशान तक सीमित नहीं होती है। जिस पंजे के दम पर वह अपने शिकार पर मजबूत पकड़ बनाता है, उसकी वह बाघ सफाई करने के साथ ही उससे नाखून पैने भी करता है। इन सभी कामों के लिए बाघ को ‘पनियाला’ का पेड़ सबसे ज्यादा पसंद है। इसकी छाल से पंजे रगड़ना उसे अच्छा लगता है। पनियाला का पेड़ साल के जंगल में ज्यादा होता है। धीरे-धीरे इसकी संख्या कम हो रही है, जिसे देखते हुए पनियाला के पौधे को नर्सरी में तैयार कर जंगल में रोपित करने की योजना बनाई गई है।
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वनराज की पसंद का भी ख्याल
मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एसके सिंह का कहना है कि तराई के जंगल में प्रोडक्शन फारेस्ट्री शुरू की गई थी। इसमें सागौन, यूकेलिप्टस, पापुलर आदि के पौधे लगाए गए। इससे मिश्रित वन का एरिया कम हो रहा था। ऐसे में कई प्रजातियों पर संकट मंडराने लगा है। इसे देखते हुए जैव विविधता संरक्षण और विकास अनुसंधान शाखा ने तराई, भाबर और पर्वतीय क्षेत्रों की ऐसी संकटग्रस्त प्रजातियों का चयन कर बचाने की कोशिश शुरू की है। इसमें वन्यजीवों को क्या पसंद है, इस बात का खास ध्यान रखा गया है। इसी के तहत जंगल के राजा के पसंदीदा ‘पनियाला’ को भी शामिल किया गया है। अपर प्रमुख वन संरक्षक अनुसंधान एवं शोध प्रकाश भटनागर कहते हैं कि इन कार्यों में सफलता मिलना शुरू हो गई है।

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