इन हालातों में कैसे होगा नंधौर से मुकाबला

Nainital Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। न साधन, न कोई उपाय। ऐसे में कैसे होगा नंधौर नदी से मुकाबला? प्रतिवर्ष बरसात में रौद्र रूप धारण करने वाली नंधौर से निपटने के बजाए इस बार भी सरकारी अमला बेबस है और नदी के दायरे में आने वाले गांव भयभीत। जिला प्रशासन ने बाढ़ सुरक्षा के लिए दस लाख रुपये स्वीकृत किए तो जंगलात की भूमि का अड़ंगा लग गया। अब कोई विकल्प नहीं। सबसे बड़ी चिंता दुबेलबेरा में हो रहे भूधंसाव ने पैदा की है।
बरसात शुरू होने के बाद नंधौर का जलस्तर हर साल अधिकतम 90 हजार से एक लाख क्यूसेक पहुंचता है। जुलाई में शुरूआती बारिश से ही नदी का पानी 15 हजार क्यूसेक पहुंच चुका है। वर्ष 2006 में इस नदी ने तबाही का जो तांडव दिखाया था, उसे लोग भूले नहीं हैं। कई घर बर्बाद हुए, कृषि योग्य भूमि पानी में बह गई और दर्जनों पालतू जानवर मारे गए। तबाही का दौर गुजरा तो सरकारी अमले ने भावी सुरक्षा की रणनीति के बजाए मुंह फेर लिया।
एक बार नंधौर के पानी को बरसात में सितारगंज तथा नानकसागर डैम के लिए डायवर्ट किया गया था। पर इससे सितारगंज में बाढ़ की समस्या पैदा हुई तो यह विकल्प भी दम तोड़ गया। असल में बाढ़ सुरक्षा के लिए बजट की कमी बड़ा रोड़ा बनती है। सरकार ने सिंचाई विभाग को पिछले दस सालों में बाढ़ सुरक्षा के नाम पर एक धेला नहीं दिया। इस साल नंधौर नदी में ठोकरें बनाने के लिए जिला प्रशासन ने स्वीकृति दी थी, पर जिस जगह काम होना था वहां वन भूमि ने अड़ंगा लगाकर आने वाले समय के लिए खतरा बढ़ा दिया है। दुबेलबेरा में भूधंसाव से लोग चिंतित हैं। दुबेलबेरा से पानी रिसते हुए मल्ला-तल्ला पचौनियां के साथ ही लाखनमंडी, आमखेड़ा गांव और चोरगलिया बाजार तक पहुंच रहा है।

इस बार कोई बंदोबस्त नहीं
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एमसी पांडे का कहना है कि वन विभाग सिंचाई विभाग को काम करने की अनुमति देने के बजाए खुद ठोकरें बनवाने की बात कर रहा है। यह इसलिए संभव नहीं क्योंकि बिना इंजीनियरों के काम नहीं किया जा सकता। इस बार सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं है। उनका कहना है कि दुबेलबेरा भूधंसाव से आने वाले समय में दिक्कतें आ सकती हैं। क्योंकि पानी का दबाव बरसात में बढ़ता है।

डीएम को भेजा पत्र
बाढ़ सुरक्षा निगरानी समिति चोरगलिया के सचिव भुवन चंद्र पोखरिया, आमखेड़ा की क्षेत्र पंचायत सदस्य कमला पोखरिया ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर खतरे से घिरे गांवों की सुरक्षा की मांग की है। इनका कहना है कि बरसात से पहले या तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए या फिर नदी के पानी से निपटने के उपाय।

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