एसटीएच में अब ग्लूकोज भी खत्म

Nainital Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। यदि आप अपने मरीज को डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराने जा रहे हैं तो फैसला सोच समझकर लें। अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं लगातार कम हो रही हैं। प्रदेश सरकार की घोर उपेक्षा से अस्पताल प्रशासन बेहद तंगी के दौर से गुजर रहा है। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाएं तो दूर अब ग्लूकोज का भी संकट खड़ा हो गया है। मरीजों को चढ़ाने के लिए ग्लूकोज तक नहीं है। चिकित्सा सेवाएं बदहाल होने से गरीब मरीजों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
डा. सुशीला तिवारी कुमाऊं का एकमात्र सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल है। एक मई 2010 में अस्पताल का सरकारीकरण होने के बाद से चिकित्सा सेवाएं दम तोड़ रही हैं। अस्पताल में महत्वपूर्ण जांच मशीनें अर्से से खराब पड़ी हैं। नई मशीनें खरीदने और पुरानी मशीनों को सही कराने के लिए बजट नहीं है। अस्पताल की इमरजेंसी में मॉस कैजुअल्टी किट और जीवन रक्षक दवाओं का महीनों से अकाल पड़ा है। अस्पताल प्रशासन निजी मेडिकल स्टोरों से जरूरी दवाएं खरीदकर बीपीएल मरीजों को मुहैया करवा रहा था। मेडिकल स्टोरों पर अस्पताल की करीब एक करोड़ की देनदारी होने के बाद उन्होंने भी दवाओं की आपूर्ति करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की स्थिति इस कदर बिगड़ गई है कि अब मरीजों के लिए ग्लूकोज तक नहीं है। स्टाफ नर्सें मरीजों के तीमारदारों से ग्लूकोज और दवाएं निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदवा रही हैं। अस्पताल में गरीब मरीजों को दवाएं और ग्लूकोज फ्री नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं चरमराने से मरीज बेस अस्पताल और दूसरे निजी अस्पतालों पर निर्भर हो रहे हैं।

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