प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में डायट का नया अड़ंगा

Nainital Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत काउंसलिंग में अभ्यर्थियों के लिए डायट द्वारा अपने स्तर से नये नियम लागू करने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर बेरोजगारों के लिए दिक्कत का सबब बन गई है। अभ्यर्थियों को एक स्थायी निवास प्रमाणपत्र निरस्त करने की बाध्यता अल्मोड़ा डायट द्वारा लागू की गई है। इससे अभ्यर्थी खासे परेशान हैं।
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शिक्षा विभाग में प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में पिछले साल दिसंबर में शासन द्वारा विज्ञप्ति निकाली गई थी। प्रदेश भर में 2253 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 दिसंबर 2011 थी। इसमें आवेदन करने के लिए योग्यता बीएड एवं यूटीईटी उत्तीर्ण होना था। प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जनपदवार निकाली गई विज्ञप्ति में कुमाऊं मंडल में सबसे अधिक पद अल्मोड़ा जनपद की जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में 561 दर्शाए गए थे। नैनीताल में केवल 70 पद होने की वजह से इस जिले के कई अभ्यर्थियों ने अल्मोड़ा से आवेदन किया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि छह माह बीतने के बाद जब इन पदों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई तो अल्मोड़ा डायट की प्राचार्य द्वारा विभाग से अलग नियम लागू कर दिया गया है। काउंसलिंग के लिए विगत 14 जुलाई को डायट अल्मोड़ा की प्राचार्य की ओर निकाली गई विज्ञप्ति में अभ्यर्थियों के लिए यह अनिवार्य दर्शायी गई कि काउंसलिंग के लिए अभ्यर्थी के पास जनपद अल्मोड़ा का स्थायी निवास प्रमाण पत्र होना चाहिए। जिन अभ्यर्थियों द्वारा यूटीईटी परीक्षा के लिए आवेदन करते समय अन्यत्र जनपद का स्थायी निवास प्रमाणपत्र लगाया गया है। ऐसे अभ्यर्थी इस जनपद का स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनाने से पूर्व अन्य जनपद के स्थायी निवास प्रमाणपत्र के निरस्तीकरण का प्रमाण पत्र साथ लायें। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासन द्वारा निकाली गई विज्ञप्ति में उस समय इस तरह की किसी तरह की बाध्यता का उल्लेख नहीं किया गया। काउंसलिंग की प्रक्रिया में अल्मोड़ा डायट ने इस तरह की बाध्यता विभाग के नियमों के इतर लागू कर दी जबकि प्रदेश की अन्य किसी डायट ने इस तरह की अनिवार्य लागू नहीं की है। तीन दिनों तक डायट में चली काउंसलिंग में करीब डेढ़ सौ अभ्यर्थियों से इस बारे में लिखित भी ले लिया गया है। इस संबंध में डायट प्राचार्य सुषमा सिंह का कहना है कि यह कोई भी अभ्यर्थी दो स्थायी निवास प्रमाणपत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता, इसलिए एक स्थायी निवास प्रमाणपत्र का निरस्तीकरण का प्रमाणपत्र लाने के निर्देश अभ्यर्थियों को दिए गए थे। शासन और शिक्षा निदेशालय से भी दिशा निर्देश मांगे गए थे लेकिन वहां से कोई निर्देश नहीं मिल सके।
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प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में विभाग की ओर से काउंसलिंग के दौरान किसी तरह का कोई नया नियम लागू नहीं किया गया है। अल्मोड़ा की डायट ने अन्य जिले का स्थायी निवास प्रमाणपत्र निरस्तीकरण का प्रमाण लाने की बाध्यता क्यों की, इस बारे में जांच कराई जाएगी।
आरके सुधांशु, महानिदेशक, शिक्षा विभाग, उत्तराखंड
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