डब्लूसीसीबी के रवैये से जंगलात खफा

Nainital Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। कालाढूंगी में बाघ की खाल खरीदने के मामले में रार बढ़ गई है। वन विभाग ने केंद्रीय एजेंसी वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्लूसीसीबी) के रवैये को लेकर मोर्चा खोल दिया है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं ने विभागीय अधिकारियों को सूचना और विश्वास में लिये बगैर सीजर आपरेशन चलाने को गलत ठहराया है।
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ज्ञात हो बाघ की खाल के खरीददार बनकर पहुंचे डब्लूसीसीबी और एसटीएफ के कर्मियों को कार्बेट पार्क की एसओजी ने दबोच लिया था। बाद में पता चला की पकड़े गये लोग डब्लूसीसीबी और एसटीएफ के कर्मी हैं, तो उन्हें छोड़ा गया। वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दिये बगैर ही धरपकड़ का आपरेशन चलाना वनाधिकारियों का नागवार गुजरा है। अब इस मामले में उच्चाधिकारियों के सामने ले जाने की तैयारी है। सीसीएफ कुमाऊं परमजीत सिंह कहते हैं कि वन विभाग के कर्मियों के अलावा कुमाऊं की एसओजी के साथ कार्बेट पार्क की एसओजी है, जो हर तरह से प्रशिक्षित है, अगर कोई धरपकड़ करनी भी थी, तो विभागीय अधिकारियों को विश्वास में लेना चाहिए था। यह गलत तरीका है। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से शिकायत की जाएगी। इस संबंध में कार्बेट प्रशासन भी डब्लूसीसीबी के सामने आपत्ति दर्ज कराने जा रहा है।
डबल एजेंट पड़ गये भारी
हल्द्वानी। सूत्रों के अनुसार डब्लूसीसीबी ने एक एनजीओ की मदद से धरपकड़ के लिए आपरेशन की रणनीति बर्नाई थी। योजना के तहत पहले एनजीओ ने अपने एक खास आदमी के जरिये बाघ की डिमांड कुछ लोगों तक पहुंचाई। बताया जाता है कि इसमें एक तिब्बती मूल का व्यक्ति भी था। बाद में जिन लोगों से खाल खरीदी जानी थी, उनके जरिये ही बात वनाधिकारियों तक पहुंच गई। इसके बाद तस्करों की तलाश में एसओजी ने एसटीएफ आदि के कर्मियों को पकड़ लिया। वनाधिकारियों के अनुसार कुछ लोग जानबूझ कर डिमांड बना कर बाघों की जान खतरे में डाल रहे हैं, अगर इस मामले में भी असली शिकारियों के साथ बात तय हो जाती, तो बाघ मारे भी जा सकता था।
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