बड़े काम है गिंगो बाइलोबा

Nainital Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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नैनीताल। जैव विविधता के लिए पहचाने जाने वाले नैनीताल में जुरासिक काल (मीसोजोइक 170 मिलियन ईयर) में पाए जाने वाला गिंगो प्रजाति का एक वृक्ष गिंगो बाइलोबा आज भी है। राजभवन और डीएसबी परिसर में लगा यह वृक्ष औषधीय रूप में काफी विशेषता रखता है। डीएसबी परिसर में हुए शोध में इसकी गुणवत्ता को परखा गया। संबंधित शोध हाल ही में न्यूयार्क की प्रसिद्ध शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुका है, जो क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
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डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. एससी सती के निर्देशन में सविता जोशी ने यह शोध किया। प्रो. सती ने अमर उजाला को बताया कि गिंगो प्रजाति के सभी पेड़-पौधों में वर्तमान में सिर्फ गिंगो बाइलोबा ही रह गया है। यह पेड़ पहले दुनियाभर में थे, लेकिन अब सिर्फ साउथ ईस्ट चीन और जापान में ही बहुतायत में रह गए हैं। यह धूप वाले स्थानों पर अधिक तेजी से विकसित होता है।
कुमाऊं हिमालयी क्षेत्र में रोपित कुछ पेड़ नैनीताल और रानीखेत में भी हैं। इसमें एक पेड़ राजभवन में तो दूसरा डीएसबी परिसर में है। वर्ष 1952 में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रथम विभागाध्यक्ष रहे प्रो. केएस भार्गव ने इसे परिसर में रोपित किया था।
प्रो. सती ने बताया कि वनस्पति विज्ञान के जनक लीनियस ने इसका नाम मेडन हेयरट्री रखा। प्रो. सती ने बताया कि सविता की ओर से किए गए शोध में इसमें व्याप्त मेटाबालिज्म में मेटाबालिटीज, लाइक टर्पीनाइट्स, पॉलीफीनोल्स और आर्गेनिक एसिड आदि की मौजूदगी को साबित किया गया, जो इसकी औषधीय गुणवत्ता का प्रमाण हैं। शोध की गुणवत्ता के बाद ही इसे विश्व प्रसिद्ध ‘द साइंटिफिक वर्ल्ड जनरल’ में प्रकाशित किया गया।
उन्होंने बताया कि यूरोप में दवाओं में इसका व्यापक सदुपयोग हो रहा है। चीन में तो इस पेड़ की पूजा भी की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि भारत में भी इसे विकसित किया जाए तो औषधीय रूप में इसका सदुपयोग किया जा सकता है।
क्यों खास है गिन्गो बाइलोबा
गिंगो बाइलोबा पेड़ में मिलने वाला मेटाबालिज्म मेमोरी को बढ़ाने, आंख संबंधित रोग, बुढ़ापा रोकने, ब्लड प्रेशर का फ्लो बढ़ाने समेत एंटी ट्यूमर, एंटी कैंसर, एंटी अल्सर आदि में सहायक है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ दिमाग से संबंधित बीमारी डिमेंसिया और एजमेयर की रोकथाम में भी यह सहायक है। प्रदूषण रोकने में भी यह बहुत कारगर है।
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