यहां खाया धक्का तो गैर प्रदेश में चला मुक्का

Nainital Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
नैनीताल। प्रदेश की महिला बॉक्सरों का कहना है कि सूबे में सुविधाओं की कमी के चलते वह किसी और प्रदेश में पलायन करने को विवश हैं। मजबूरी में वह अन्य प्रदेशों में कोचिंग कर अपनी प्रतिभा को निखारते हैं। बाद में उन्हें निजी कंपनी अथवा किसी फर्म के लिए खेलना पड़ता है। ऐसे में पदक मिलने के बाद भी सूबे के लिए कुछ न करने का उन्हें मलाल रहता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में हुए नेशनल गेम्स 2011 में उन्होंने कांस्य पदक जीता, लेकिन प्रदेश से मिलने वाले 75000 रुपये उन्हें अभी तक नहीं मिले।
नैनीताल घूमने आई बॉक्सर प्रियंका चौधरी ने बताया कि वह 57 किलो भार वर्ग में खेलती हैं। उन्होंने नेशनल गेम्स 2011 में कांस्य पदक प्राप्त किया। घायल होने के कारण वह ओलंपिक चयन के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई। अब वह 2016 के ओलंपिक गेम्स में प्रदर्शन के लक्ष्य के अनुरूप तैयारी कर रही हैं। अल्मोड़ा मूल की तथा 2003-04 में नेशनल बाक्सिंग की स्वर्ण पदक विजेता तथा वर्तमान में स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर हिसार में बतौर कोच बॉक्सरों को प्रशिक्षण दे रही हेमलता बगडवाल का कहना है कि उत्तराखंड में जन्म लेने के बावजूद विभिन्न प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने पर वह अपने प्रांत को सम्मान नहीं दिला पातीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी कतई नहीं है। जरूरत है तो प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तथा सुविधाएं मुहैया कराने की।
राजस्थान की सीमा पुनिया का कहना है कि उनकी साथी प्रियंका समेत विनीता मेहर तथा हेमंती को नेशनल गेम्स में कांस्य जीतने के बाद आज तक धनराशि नहीं मिली है, लेकिन उन्हें पूर्व में ही राजस्थान प्रदेश से उक्त धनराशि घर पर आकर दी गई। राजस्थान में खेल सुविधाओं के सवाल पर कहा कि वह प्रदेश की सुविधाओं से संतुष्ट हैं। हरियाणा की नीतू ने कहा कि कामन वेल्थ 2014 में महिला बॉक्सिंग को शामिल करने पर सभी बॉक्सरों में गजब का उत्साह है। जिसके लिए सभी भरसक तैयारी कर रहे हैं।

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