विडंबना : दो-चार लोगों को हर साल लीलती है महाकाली

Nainital Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंपावत। कालापानी से निकलने वाली महाकाली नदी अपने तेज प्रवाह और उथले घाटों के कारण पहचानी जाती है। इस नदी के पीछे सबसे बड़ी विडंबना यह जुड़ी है कि यह हर साल दो-चार लोगों की जान जरूर ले लेती है। इस बार चंपावत नगर के दो युवा महाकाली नदी के कोप का शिकार बने हैं।
महाकाली नदी कालापानी से निकलने के बाद जब आगे बढ़ती है तो उसमें कई ग्लेशियरों का पानी मिलता रहता है। कालापानी कैलास मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। महाकाली नदी जब कालापानी से आगे बढ़ती है तो उसमें सबसे पहल गुंजी में ग्लेशियर से निकलने वाली कुटीयांगती नदी मिलती है। उसके बाद छियालेक में आपी ग्लेशियर, गर्व्यांग में सीतापुल के पास नंपा ग्लेशियर, बूंदी में गल्गा ग्लेशियर, मालपा में पंपा ग्लेशियर का पानी भी महाकाली नदी में मिलता है। ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों का स्वभाव अन्य नदियों की तुलना मे बेहद अलग होता है। महाकाली नदी में चूंकि कई ग्लेशियर मिलते हैं, ऐसे में इस नदी का प्रवाह गर्मी में बर्फ पिघने से असीमित हो जाता है। यह भी कहा जाता है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, ग्लेशियर वाली नदियों में पानी की मात्रा उतनी ही बढ़ जाती है।
महाकाली नदी के इस स्वभाव से आमतौर पर लोग अनभिज्ञ रहते हैं। नहाने को जाने वालों को नदी की रफ्तार, प्रवाह, उथलेपन की कम जानकारी रहती है। यही अनजानापन उनके लिए खतरे का सबसे बड़ा कारण बन जाती है। पंचेश्वर में रविवार को दो युवा व्यवसायियों के महाकाली नदी में डूबने के पीछे यही कारण सामने आ रहे हैं कि युवाओं को नदी के असली स्वभाव की कोई जानकारी नहीं रही होगी। वह गर्मी के सीजन में बढ़ने वाले नदी के प्रवाह से कतई अनजान रहे होंगे।

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