कमीशन एजेंट नीति में कई छेद

Haldwani Bureau Updated Wed, 15 Nov 2017 02:22 AM IST
हल्द्वानी। चावल मिलों और भाजपा विधायकों के दबाव में जारी कच्चा आढ़तियों के माध्यम से धान खरीद नीति में कई छेद नजर आ रहे हैं। इसमें किसानों के भुगतान के तरीके पर संशय है।
कच्चा आढ़तियों के लिए पूर्व में नीति जारी करते हुए सरकार ने किसानों को भुगतान के तरीके पर स्थिति साफ नहीं की थी। 2017-18 की नई नीति में भी इस मुद्दे पर बात नहीं हो पाई। नई नीति में खरीद से कमीशन एजेंट ही बाहर कर दिए गए थे। अब कच्चा आढ़तियों के लिए नीति जारी हुई तो उसमें भी इस मुद्दे पर छुप्पी रखी गई है। इतना कह दिया गया है कि 2017-18 की नीति के दिशा निर्देश कच्चा आढ़तियों पर लागू होंगे। इस दिशा -निर्देश में यह साफ है कि किसानों को भुगतान आरटीजीएस या चैक के जरिए होगा। लेकिन ये आदेश सरकारी खरीद एजेंसियों के लिए हैं। साफ है कि इसमें झोल है और आढ़ती इसका फायदा उठा सकते हैं।
नीति में यह तक नहीं बताया गया है कि उत्तराखंड के किसानों से या बाहरी प्रदेश का धान खरीदा जाएगा। इतना कहा है कि उत्तराखंड के कृषकों का धान प्राथमिकता के आधार में तोला जाएगा। इस पर भी संशय है। साथ ही विभाग ने अपने कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए कच्चा आढ़तियों से धान खरीद की नीति से उन्हें हटा दिया गया है। अब धान खरीद मंडी समिति के सचिव देखेंगे।

कच्चा आढ़ती के माध्यम से धान खरीद में राज्य के साथ बाहरी राज्यों के किसानों से धान खरीद होगी या नहीं। इसके बारे में स्पष्ट नहीं हूं। मैंने अभी नीति की गहनता से नहीं पढ़ा है। - आनंद वर्द्घन प्रमुख सचिव खाद्य

मंडी में धान की बोली के लिए जगह नहीं कैसे होगी खरीद
कच्चा आढ़तियों के माध्यम से कैसे धान खरीद होगी। इस पर संचय बरकरार है। मंडी समिति का नियम कहता है कि कच्चा आढ़ती वहीं किसानों से उसकी उपज खरीद सकता है। जहां का उसको लाइसेंस दिया गया है। कच्चा आढ़तियों को मंडी समिति की ओर से लाइसेंस जारी किया जाता है। इस आधार पर कच्चा आढ़ती मंडी समिति परिसर में ही धान खरीद सकता है। काशीपुर, बाजपुर, रुद्रपुर सहित कई मंडियों में धान खरीदने उसकी बोली लगाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। हल्द्वानी मंडी में तो मंडी परिषद के पास अपना यार्ड तक नहीं हैं। गढ़वाल की बात करें तो मंडी समितियों ने जो सूचना अधिकार के तहत सूचना दी है, उसमें साफ कहा गया है कि उनके पास मंडी परिषद में यार्ड तक नहीं है। ऐसे में कैसे खरीद हो पाएगी। फिर एक बार कच्चा आढ़ती सरकार को करोड़ों का चूना लगाएंगे।

मंडी समिति के सचिवों ने धान खरीद करने से किए हाथ खड़ा
मंडी समितियों ने इस नीति में खोट बताते हुए अंदर खाने इसका विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को मंडी परिषद रुद्रपुर के कार्यालय में होने जा रही सचिवों की बैठक में इसका विरोध हो सकता है। सचिवों का कहना है कि मंडियों में न तो यार्ड की व्यवस्था है। न इतनी भारी मात्रा में धान खरीद की जा सकती है। उन्होंने पिछली बार कच्चा आढ़तियों की ओर से दबाव बनाने की बात को भी उठाना शुरू कर दिया है।

इन नियमों का पालन करना होगा
1- धान की खरीद मंडी समितियों में करानी होगी।
2- किसानों की फसल की बोली लगानी होगी।
3- इसकी रिकार्डिंग भी करानी होगी।
4- कच्चे आढ़तियों को खाद्य विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए बोरों में उल्टा करके धान भरना होगा।
5- उल्टे बोरे में कच्चा आढ़तियों का कोड, वजन आदि की स्टेंशिल लगानी होगी।

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