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भारी राशि खर्चने के बाद कोर्ट शिफ्ट करना अव्यवहारिक

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Mon, 17 Jun 2019 02:03 AM IST
uttarakhand high court
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नैनीताल। नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट करने के विचार पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल राज्य की स्थापना विभिन्न सुविधाएं और प्रशासनिक इकाइयां पहाड़ पर स्थापित करने की मांग पर ही की गई थी। राजधानी तो पहले ही मैदानी शहर में बना दी गई अब कोर्ट भी मैदानी क्षेत्र में शिफ्ट करने का विचार तमाम लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
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नैनीताल से हाईकोर्ट किसी मैदानी क्षेत्र में शिफ्ट करने-नहीं करने को लेकर अधिवक्ताओं के साथ ही आम लोगों में भी बहस छिड़ गई है। पक्ष-विपक्ष में लोगों के अपने-अपने तर्क हैं। कई लोग अपने निजी नफे-नुकसान के हिसाब से भी इसके पक्ष-विपक्ष में नजर आ रहे हैं, लेकिन इस सबके बीच में कुछ बुनियादी सवाल हैं, जिन पर विचार जरूरी है। हाईकोर्ट को नैनीताल में बनाए रखने के पक्षधर लोगों का तर्क है कि हाईकोर्ट की अवस्थापना में अब तक का खर्च करोड़ों से बढ़कर अरब में पहुंच रहा है। इतनी बड़ी राशि खर्चने के बाद केवल मौसम, पार्किंग या हल्द्वानी-नैनीताल के बीच के किराए जैसे कारणों को लेकर कोर्ट ही शिफ्ट कर दिया जाना कितना व्यवहारिक होगा, यह विचारणीय है। वह भी तब जब किसी भी दूसरी जगह कोर्ट बनाने में भूमि, भवन सहित कई अरब रुपये का खर्च आना निश्चित है। जिस प्रदेश में पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की भारी कमी है, वहां अरबों रुपये इन कारणों से खर्च दिया जाना कितना उचित है यह एक बड़ा सवाल है।
बेशक नैनीताल में चिकित्सा और पार्किंग सुविधाओं की भारी कमी है। स्वयं हाईकोर्ट इनके निदान के लिए कठोर रुख अपनाते हुए कई निर्णय दे चुका है, जिनमें बड़े पार्किंग स्थल विकसित करना और नैनीताल के अस्पतालों में मल्टी स्पेशलिटी सुविधा विकसित करने के आदेश शामिल हैं। बावजूद इन पर तो कुछ हुआ नहीं हुआ, लेकिन इन्हीं कमियों के आधार पर कोर्ट को ही शिफ्ट करने पर विचार शुरू हो गया। ऐसे में अरबों रुपये खर्च कर कोर्ट शिफ्ट करने से बजाय चंद करोड़ खर्च कर मेडिकल सुविधा और मेट्रोपोल में उपलब्ध स्थान पर मल्टी स्टोरी पार्किंग बना देना क्या बेहतर विकल्प नहीं है, जिसका लाभ वकीलों, स्टाफ, न्यायाधीशों के अलावा आम लोगों, पर्यटकों, कारोबारियों को भी मिल सके। इसी नजरिये से देखें तो देश के कई हाईकोर्ट पहाड़ी एवं पर्यटक शहरों में हैं, जिनमें शिमला, श्रीनगर (कश्मीर), शिलांग, नगालैंड की कोहिमा बेंच, गंगटोक आदि शामिल हैं। वहां ऐसी मांग नहीं उठी।



हाईकोर्ट शिफ्ट करने के विचार पर छिड़ी बहस
नैनीताल में बनाए रखने के पक्षधर भारी राशि खर्चने के बाद कोर्ट शिफ्ट करने को अव्यवहारिक मान रहे
शिफ्ट करने के बजाय व्यवस्था सुधारना अहम
हिल स्टेशनों पर हैं कई दूसरे कोर्ट भी

कोर्ट शिफ्टिंग के विचार से असहमत है हाईकोर्ट बार
आज कोर्ट के समक्ष रखेगा अपना पक्ष
नैनीताल। नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के विचार से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन असहमत है। इस संबंध में बार अपना पक्ष सोमवार को कोर्ट के समक्ष रखेगा। बार अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट ने कहा कि बार से विचार-विमर्श किए बगैर ऐसे प्रस्ताव पर सुझाव आमंत्रित किए जाने पर उन्हें आश्चर्य हुआ है। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन कोर्ट को अन्यत्र कहीं भी शिफ्ट करने से सहमत नहीं है। बिष्ट ने कहा कि इस संबंध में सोमवार को बार की आम कार्यकारिणी की बैठक भी की जाएगी।

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