युवाओं को नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने जरूरत-कोर्डिनेशन

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Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2019 01:44 AM IST

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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की ओर से द्वितीय सतत पर्यावरण एवं प्रबंध और ऊर्जा, क्रियात्मक सामग्री एवं नैनो प्रौद्योगिकी विषय पर तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। विवि के हरमिटेज सभागार में शुक्रवार को बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर और कुमाऊं विवि के कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस राना ने इसका शुभारंभ किया। उन्हाेंने नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने जरूरत बताई।
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उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. भटनागर ने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी का प्रयोग समाज के हित में किया जा सकता है। कुलपति प्रो. केएस राना ने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से बेकार प्लास्टिक से ग्राफीन का निर्माण प्लास्टिक प्रबंधन का एक कारगर उपाय है जो प्रदूषण को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा। तकनीकी सत्र में यूएसए से आए प्रो. सुुरेंद्र सक्सेना ने कहा कि हाइड्रोजन से ऊर्जा का निर्माण एक दिशा प्रदान कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया से आए प्रो. अली अब्बास ने कहा कि कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग ऊर्जा के रूप में किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया में यह ऊर्जा उत्पत्ति का बड़ा स्रोत है। सेमिनार के दौरान पोस्टर प्रजेंटेशन भी हुआ। सेमिनार के चेयरमैन प्रो. एबी मेलकानी ने सभी का स्वागत किया। डॉ. गीता तिवारी ने संचालन किया। इस मौके पर डीन साइंस प्रो. गंगा बिष्ट, परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत, प्रो. चित्रा पांडे, प्रो. एसपीएस बिष्ट, प्रो. नीता बोरा शर्मा, प्रो. मुन्नी पडलिया, प्रो. एचसी चंदोला, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. राजीव उपाध्याय, डॉ. बीना पांडे, डॉ. महेंद्र राणा, डॉ. संतोष उपाध्याय, विधान चौधरी, भास्कर बोरा, सुनील ढाली, दीपक मेलकानी, अरुण बुधानी, संदीप पांडे आदि थे।


नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने जरूरत
कुमाऊं विवि में शुरू हुआ द्वितीय तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार
चार विदेशी विद्वानों के साथ ही दो सौ अधिक विद्यार्थी कर रहे प्रतिभाग



एंथ्रेक्स बीमारी के लिए तैयार किया टीका
नैनीताल। एंथ्रेक्स बीमारी के उपचार के लिए टीका ईजाद किया गया है। बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने बताया कि एंथ्रेक्स से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार आता है। आम तौर पर ऐसे लक्षणों को निमोनिया मान लिया जाता है लेकिन यह एंथ्रेक्स के लक्षण हो सकते हैं। बताया कि यह बीमारी आमतौर पर जानवरों को होती है। यह संक्रमण से फैलती है। मनुष्य में जानवरों के संपर्क में आने से होती है। प्रो. भटनागर ने बताया कि इसके लिए ईजाद हुआ टीके को पहले ही लगाने से एंथ्रेक्स का असर नहीं होता। बताया कि प्रयोगशाला के साथ ही चूहे, खरगोश, बंदर में इसका सफल प्रयोग किया जा चुका है। एक कंपनी को इस टीके को दे दिया गया है। वहां भी दो चरणों में परीक्षण हो चुका है। तीसरे, चौथे चरण का परीक्षण जल्द पूरा हो जाएगा। अगर किसी ने टीका नहीं लगाया है और वह एंथ्रेक्स के संपर्क में आ जाता है तो इसका असर खत्म करने के लिए भी तकनीक ईजाद कर ली गई है। मानव जीन के अनुसार तैयार किया जा रहा है।

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