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झीलों के संरक्षण के लिए ठोस योजना की दरकार

Haldwani Bureau Updated Mon, 05 Jun 2017 12:44 AM IST
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झीलों के संरक्षण के लिए ठोस योजना की दरकार
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नैनीताल/भीमताल।

कभी नैनीताल जिले को लेक डिस्ट्रिक्ट के नाम से जाना जाता था। तब इस जिले में झीलों की संख्या 60 के करीब थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, लेक डिस्ट्रिक्ट की झीलें भी इतिहास बनती रहीं। अब जिले में गिनीचुनी झीलें ही शेष रह गई हैं।

समय रहते बची हुई झीलों के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं, जब गिनीचुनी झीलें भी अपना अस्तित्व खो देंगी। जरूरी है कि शासन-प्रशासन के अलावा आम लोग भी झीलों को बचाने के लिए अपने स्तर से सहयोग करें। जिले की इन झीलों के चलते हजारों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।

जिले में नैनी झील के अलावा भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल और ओखलकांडा ब्लॉक में हरीशताल और लोहाखाम ताल झीलें मौजूद हैं। इनमें से नैनी झील का जलस्तर लगातार गिर रहा है और झील वर्तमान में अपने प्राकृतिक स्वरूप को खो चुकी है। नैनी झील को बचाने के लिए शनिवार शाम सैकड़ों लोगों ने नंगे पैर पदयात्रा कर झील बचाने का संकल्प भी लिया था।

हालांकि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हाल ही में अमर उजाला में संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए झील की देखरेख का जिम्मा लोनिवि से हटाकर सिंचाई विभाग को सौंप दिया और झील को हर हाल में संरक्षित करने तथा नैनी झील के कार्यों की स्वयं मॉनीटरिंग करने की बात कही है। लेकिन, जरूरत इस बात की है कि नैनी झील के गिरते जलस्तर के कारणों का पता लगाने और जलस्तर सामान्य बनाए रखने के लिए सरकार ठोस नीति तैयार करे।

नैनी के अलावा अन्य झीलों पर ध्यान क्यों नहीं

नैनी झील पर तो सरकार और जिला प्रशासन का पूरा फोकस है, लेकिन नैनीताल के पास स्थित भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल झीलें आज भी उपेक्षित हैं। भीमताल झील में मल्लीताल छोर से हर साल बड़ी संख्या में सिल्ट आ रही है और झील का एक बड़ा हिस्सा मैदान में तब्दील हो चुका है।

बार-बार मांग के बाद भी सरकार ने झील से सिल्ट निकालने के लिए बजट स्वीकृत नहीं किया। इसी तरह सातताल झील जहां कभी सात झीलें हुआ करती थीं अब केवल गरुड़ताल, नलदमयंती ताल, राम-सीता ताल का ही अस्तित्व कायम है, जबकि पिछले वर्षों में सिंचाई विभाग ने हनुमान ताल के प्राकृतिक स्वरूप को ही बिगाड़कर रख दिया है।

सातताल की अन्य झीलें कई साल पहले अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। यही हाल नौकुचियाताल झील का भी है। कहने तो यहां झील विकास प्राधिकरण द्वारा पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए एरियेशन कराया जा रहा है, लेकिन झील के सुंदरीकरण और उसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आज तक कोई भी विभाग सामने नहीं आया है।

नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाली नालियां ही नहीं बल्कि कई जगह तो आज भी घरों से निकलने वाला सीवर सीधे झील में गिरता है। यह हाल तब है जबकि इसी पानी को अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

झीलों के कारण ही नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों का अस्तित्व कायम है। यदि झील ही नहीं रहेंगी तो इन क्षेत्रों में लोगों का रह पाना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि झीलों को बचाने के लिए सरकार ठोस रणनीति तैयार करें और उसे बगैर किसी लोभ के धरातल पर उतारे, तभी पर्यावरण दिवस पर लिए जाने वाला संकल्प साकार हो सकेगा।
- डॉ. अजय रावत, पर्यावरणविद और इतिहासकार।

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