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रुद्रपुर में ताबड़तोड घटनाएं पुलिस के लिए बनी चुनौती-हल्द्वानी

Haldwani Bureau Updated Sun, 04 Jun 2017 12:32 AM IST
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अब गैंगवार की भी आशंका भी जता रही है पुलिस
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रुद्रपुर। शनिवार तड़के भदईपुरा क्षेत्र के वार्ड चार में पूर्व सभासद को मौत के घाट उतारने के इरादे से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने के मामले में अब गैंगवार की भी आशंका जताई जा रही है। पिछले डेढ़ साल के भीतर राजेश गंगवार पर तीन बार हमले हो चुके हैं। एक हमला उसके भाई अन्नू पर भी इंदिरा कॉलोनी में स्थित सैलून में हुआ था।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2014 में पूर्व सभासद राजेश गंगवार के इशारे पर उत्तराखंड हाइकोर्ट में एक व्यक्ति ने सरकारी भूमि कब्जाने के मामले में याचिका डाली थी। यह केस लगातार चलता रहा और वर्ष 2016 में जमीन का मामला हाइकोर्ट में वैध निकला और आरोप निराधार साबित हुए। यहीं से यह मामला रंजिश का रूप ले गया।
अब रंजिश का यह सिलसिला अपने चरम पर पहुंच चुका है। पुरानी होती रंजिश से दोनों पक्ष एक दूसरे के खून के प्यासे होने लगे हैं। अब गैंगवार की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
राजेश गंगवार पर जानलेवा हमला होने के बाद भी परिजनों की ओर से पुलिस में तहरीर न देना भी सवाल खड़े कर रहा है। खुद राजेश गंगवार राजनीतिक रुप से सक्रिय है। एसएसपी डा. सदानंद दाते का कहना है कि रंजिश पुरानी चल रही है। इसमें कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

तो एक व्यक्ति ने कर दिया है सरेंडर
रुद्रपुर। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि राजेश गंगवार पर फायरिंग मामले में एक व्यक्ति ने शाम को रुद्रपुर कोतवाली में सरेंडर कर दिया है। जबकि पुलिस अधिकारी अभी इस बात को नकार रहे हैं। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि जिस व्यक्ति ने सरेंडर किया है उसके नाम की आईडी से फर्जी तरीके से गाड़ियां लोन पर निकाल रखी थीं। इसको लेकर भी रंजिश बढ़ती जा रही है।

भाजपा में शामिल होने का किया था प्रयास
रुद्रपुर। पूर्व सभासद राजेश गंगवार ने इस बार भाजपा में शामिल होने का भी मन बनाया था, लेकिन कुछ लोगों के पुरजोर विरोध के कारण मामला खटाई में पड़ गया। 15 सालों में राजेश ने निर्दलीय ही सभासद का चुनाव लड़ा और अपनी मां को भी नगर निगम का चुनाव लड़ाया। इस बार प्रदेश में जैसे ही भाजपा की सरकार आई तो होली से एक दिन पहले दूधिया बाबा मंदिर स्थित एक स्थल में भाजपा में शामिल होने का एक कार्यक्रम तय हो गया था। वहां मामला गर्मा गया और भारी हंगामे के बीच मामला वहीं ठप हो गया।

पुलिस की ढीली पड़ती गश्त
रुद्रपुर। पिछले एक सप्ताह से रुद्रपुर शहर में जिस तरह से अपराध बढ़ता जा रहा है उसके पीछे ढीली पड़ती पुलिस गश्त को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। इससे पहले रुद्रपुर कोतवाली में 22 माह तक कोतवाल रहे जेसी पाठक के कार्यकाल में दिन रात की गश्त का ही परिणाम रहा कि 22 महीने में कोई हत्या और जघन्य अपराध रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र में नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि पुलिस की कड़क सख्ती और तेज गश्त से ही अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

याद आया कोतवाल पाठक का कार्यकाल
रुद्रपुर। पिछले एक सप्ताह से रुद्रपुर शहर में जिस तरह से अपराध बढ़ता जा रहा है उसके पीछे ढीली पड़ती पुलिस गश्त भी कम जिम्मेदार नहीं है। शहर के लोगों का कहना है कि रुद्रपुर कोतवाली में 22 माह तक तत्कालीन कोतवाल रहे जेसी पाठक के कार्यकाल में कोई हत्या, गैंगवार, लूटपाट जैसी घटनाएं नहीं हुईं। हालांकि उस दौरान कई बार असामाजिक तत्वों ने शहर का माहौल खराब करने की कोशिश तो जरूर की, लेकिन पाठक की मजबूत कार्यशैली और दिनरात की गश्त का ही परिणाम रहा कि 22 महीने के कार्यकाल में कोई हत्या और जघन्य अपराध रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र में नहीं हुआ। शहर के इंदिरा चौक से लेकर मुख्य मार्गों पर घंटों उनकी तैनाती से छोटे से लेकर बड़ा अपराधी भी खौफ खाता था। पाठक का कड़क अंदाज आज शहर के लोगों को याद आ रहा है। लोगों का कहना है कि पुलिस की कड़क सख्ती और तेज गश्त से ही अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बता दें कि जेसी पाठक का बतौर रुद्रपुर कोतवाल का कार्यकाल दिसंबर 2014 से मार्च 2016 और फिर जुलाई 2016 से दिसंबर 16 तक रहा है।

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