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डेढ़ किमी दूर हैंडपंप से पानी ढो रहे तीन गांवों के लोग

Dehradun Bureau Updated Wed, 12 Sep 2018 10:32 PM IST
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यमकेश्वर। ग्राम पंचायत पोखरी के तीन गांवों में सात महीने से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। लोगों और स्कूली बच्चों को डेढ़ किमी दूर हैंडपंप से पानी ढोना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी विभाग लापरवाह बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि देखरेख के अभाव में पेयजल लाइन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होकर ठप हो गई है।
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वर्ष 1984-85 में नौगांव के प्राकृतिक जलस्रोत से 14 लाख रुपये की लागत से पोखरी पेयजल योजना का निर्माण किया गया था। पोखरी, पोखरीडांडा, घयालगांव और प्राथमिक विद्यालय पोखरी को इससे जोड़ा गया था। विभागीय उपेक्षा और देखरेख के अभाव में पिछले सात महीने से इन गांवों के नलों पर एक बूंद पानी नहीं टपका है। इन तीनों गांवों में रहने वाले 50 से अधिक परिवार और प्राथमिक विद्यालय पोखरी में शिक्षा ले रहे 35 बच्चों को पीने के पानी के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीण बलदेव सिंह नेगी, उर्मिला देवी, सुरेशी देवी, प्रेम सिंह व कविता देवी ने जलसंस्थान पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभाग को गांव में पानी नहीं आने की कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ग्रामीणों ने पोखरी पेयजल योजना से पानी नहीं आने पर कीम गधेरा योजना से पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
जलसंस्थान के जेई रतन सिंह रावत ने बताया कि पोखरी पेयजल लाइन पर भड़ेत तक तो पानी आ रहा है। आगे की लाइन चोक हो रखी है, जिसे एक सप्ताह के अंदर ठीक करवा दिया जाएगा।

गोरखपुर गांव में पेयजल संकट गहराया
आपदा में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को ठीक नहीं कर पाया जलसंस्थान
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के मवाकोट स्थित गोरखपुर गांव के 18 परिवार पेयजल संकट जूझ रहे हैं। अगस्त माह में आई आपदा के बाद से अब तक जल संस्थान कोटद्वार क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को सुचारुनहीं कर पाया है। इससे लोगों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जलसंस्थान से शीघ्र पेयजल व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है।
गोरखपुर गांव निवासी शांति थापा, सुलोचना देवी, विमला बहुखंडी, विमला चौहान, अनिता देवी, उर्मिला देवी, नंदी देवी, पुष्पा देवी व ज्योति देवी ने जल संस्थान के ईई को ज्ञापन सौंपकर गांव में एक पखवाड़े से अधिक समय से पेयजल किल्लत होने की बात बताई। उन्होंने कहा कि पेयजल लाइनें पुरानी होने के कारण खराब हो चुकी हैं। पिछले एक माह से पेयजल पाइप लाइन जाम होने के कारण पानी की किल्लत हो रही थी, लेकिन 25 अगस्त की आपदा के बाद पेयजल लाइनें पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। गांव की सिंचाई नहर भी टूट गई है, जिससे कपड़े धोने और नहाने के लिए मिलने वाला पानी भी बंद हो गया। गांव के 18 परिवारों के समक्ष पेयजल संकट खड़ा हो गया है।
जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला का कहना है कि बुधवार को क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को ठीक कर पेयजल व्यवस्था सुुुुचारु करने का प्रयास किया जा रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में गांव में टैंकर भिजवाए जा रहे हैं।

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