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एडीजी ने दिए कथित गैंगरेप के गहनता से जांच के आदेश -

Dehradun Bureau Updated Fri, 12 Jan 2018 10:41 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पुलिस के एक दारोगा, उसके रिश्तेदार और एक बुजुर्ग पर लगे गैंगरेप के मामले की फाइल दोबारा खुल गई है। एडीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने गहनता से जांच के आदेश देते हुए कहा कि इस पूरे मामले की तस्वीर साफ होना जरूरी है। पहले पीड़िता के नहीं मिलने पर पुलिस ने केस खारिज कर दिया था।
एडीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है कि इस पूरे मामले की असलियत सामने आनी जरूरी है। गैंगरेप हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और अगर यह झूठी शिकायत है तो साजिश करने वाले चेहरे सामने आने भी जरूरी है। पिछले दिनों ज्वालापुर कोतवाली में तैनात रहे और हाल में खड़खड़ी चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार, उसके रिश्तेदार एवं एक परिचित बुजुर्ग पर मां- बेटी से रेप का आरोप लगाते हुए डीजीपी अनिल रतूड़ी को शिकायती पत्र भेजा गया था। क्षेत्र के लाल मंदिर कालोनी की रहने वाली एक विधवा ने आरोप लगाया था कि कई वर्ष पहले वह शराब के अवैध धंधे में लिप्त थी, तब उसके साथ कई बार गैंगरेप हुआ। आरोप था कि ज्वालापुर कोतवाली में तैनात एसआई प्रदीप कुमार ने डरा धमकाकर उसकी बालिग बेटी के साथ भी रेप किया है। शिकायत बेहद मार्मिक ढंग से लिखी गई थी।ञ डीजीपी ने इसे गंभीरता से लेते हुए ज्वालापुर कोतवाली में गैंगरेप का केस दर्ज करने का आदेश दिया था।
ज्वालापुर पुलिस ने एक सप्ताह के अंदर ही गैंगरेप के मुकदमे को झूठा करार देकर खारिज कर दिया था। तर्क दिया था कि शिकायतकर्ता नाम की कोई महिला क्षेत्र में रहती ही नहीं है। ऐसे में गैंगरेप की बात समझ से परे है। इस बीच एडीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने एक बार फिर से मुकदमे की गहनता से जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि गैंगरेप की यदि झूठी शिकायत की गई है तो उस शख्स का भी पता चलना चाहिए। पत्र हस्तलिखित होने से शिकायतकर्ता तक पहुंचा जा सकता है। कहा कि जल्दबाजी में केस खारिज करना ठीक नहीं है।

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