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कुंभ में हादसे का कारण बन गया वीआईपी द्वार

Haridwar Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
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हरिद्वार। कार्यक्रम कोई भी हो विशेष लोगों के लिए विशेष सुविधा का इंतजाम कर दिया जाता है। विशेष लोगों के लिए ऐसी ही विशेष सुविधा का इंतजाम हरिद्वार कुंभ में भी किया गया है। यही विशेष सुविधा वहां पर हादसे का कारण बनी और चालीस से अधिक जिंदगयिां असमय मौत के मुंह में समा गईं। प्रयाग कुंभ में हुए हादसे के चश्मदीद यात्रियों को लेकर हरिद्वार एक्सप्रेस सोमवार देर रात सवा बारह बजे हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर पहुंची। ट्रेन से उतरे लोगों के चेहरों पर हादसे में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना और रेल प्रशासन के प्रति गुस्सा स्पष्ट दिख रहा था। यात्रियों ने इलाहाबाद स्टेशन के वीआईपी प्रवेश द्वार को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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इलाहाबाद स्टेशन पर हुए हादसे के बाद हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर पहली ट्रेन इलाहाबाद-हरिद्वार एक्सप्रेस 11 घंटे देरी से सोमवार देर रात 12.25 बजे पहुंची। ट्रेन से उतरे ज्यादातर यात्री हादसे के वक्त इलाहाबाद स्टेशन पर मौजूद थे। यात्रियों में अजीब सी खामोशी थी। जब इनसे कुंभ हादसे के बारे में पूछा गया तो कुछ क्षण के लिए इन्हें बोलने के लिए शब्द ही नहीं मिले। फिर अचानक भड़क गए। इनका कहना था अगर रेल प्रशासन चाहता तो हादसा टल सकता था। इलाहाबाद स्टेशन पर मारे गए यात्रियों के गुनाहगार वीआईपी द्वार थे। यात्रियों के अनुसार स्टेशन पर वीआईपी के लिए आने-जाने की विशेष सुविधा देने के उद्देश्य से रास्ते में परिवर्तन किया गया था। स्टेशन के अंदर वीआईपी के लिए एक नंबर प्लेटफार्म से व्यवस्था थी। जबकि अन्य यात्रियों के लिए सिविल लाइंस से स्टेशन आने जाने की व्यवस्था की। यात्रियों ने बताया स्टेशन से पीछे कई किलोमीटर तक जनसैलाब था। यात्री सिविल लाइंस वाले छोर से आ-जा रहे थे। यात्रियों के मुताबिक भीड़ को नियंत्रित करने की बजाए पुलिसवालों ने लाठी फटकार दी। इससे भगदड़ मच गई और हादसा हो गया। चश्मदीद यात्रियों के अनुसार हादसे के डेढ़ घंटे बाद तक कोई सुरक्षाकर्मी नहीं पहुंचा।


हादसे के बाद भी नहीं चेता रेलवे
दर्जनों यात्रियों की मौत के बाद भी रेलवे प्रशासन नहीं चेता। रेल विभाग ने इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस के प्लेटफार्म संख्या नौ पर आने की घोषणा ट्रेन के प्लेटफार्म पर लगने के बाद की। अचानक ट्रेन के प्लेटफार्म बदलने की घोषणा से यात्रियों में आपाधापी मच गई। इससे एक और हादसा हो सकता था। यात्रियों ने बताया ट्रेन को पहले दो नंबर प्लेटफार्म पर आना था। इसके छूटने का समय रात 11.35 था। लेकिन हादसे के बाद ट्रेन चार घंटे देरी से प्लेटफार्म-नौ से सुबह 3.35 मिनट पर रवाना हुई। यात्रियों के मुताबिक ट्रेन के प्लेटफार्म संख्या नौ पर लगने के बाद उद्घोषणा की गई। जिसके कारण बहुत से यात्रियों की ट्रेन छूट गई।

अपनों को तलाश रही थी निगाहें
ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर कई लोग परिजनों को तलाशते दिखे। हरिद्वार से भी हजारों लोग इलाहाबाद में मौनी अमावस्या पर स्न्नान करने के लिए गए थे। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही लोग अपने-अपने परिजनों की ढूंढते दिखे।

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