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धर्मशाला के लाइसेंस पर विवाद

Haridwar Updated Mon, 11 Feb 2013 05:31 AM IST
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हरिद्वार। नगरपालिका ने रामलीला भवन भीमगोड़ा को धर्मशाला मानते हुए श्रीराम नाट्य संस्थान के महामंत्री के आवेदन पर पांच जून 2006 को धर्मशाला का लाइसेंस जारी कर दिया। इसकी वार्षिक आय चार हजार रुपये के आधार पर 300 रुपये गृहकर निर्धारित कर चेक से जमा भी करा दी गई। लाइसेंस का मार्च 2011 में नवीनीकरण भी किया गया है।
इस भवन में 14 कमरे तथा एक बड़ा हॉल दर्शाया गया है। अब जब फिर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आया तो छानबीन करने पर कुछ और ही कहानी सामने आई। जिस जमीन पर रामलीला भवन खड़ा है वह नगरपालिका की संपत्ति है। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता रवि त्यागी की शिकायत है कि कुछ लोग सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने ज्ञापन देकर मांग की है कि रामलीला भवन का एक व्यक्ति विशेष के नाम धर्मशाला का लाइसेंस दिए जाने की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित किया जाए और नगर निगम भवन को अपने कब्जे में लेकर टाउन हाल के रूप में उसका संचालन करें, जिससे निगम को राजस्व प्राप्त होगा।

नगर निगम के अपर मुख्य नगर अधिकारी हर्षवर्धन मिश्रा ने बताया कि निगम की ओर से लाइसेंस नहीं दिया गया है। नगरपालिका के समय रामलीला भवन को धर्मशाला का लाइसेंस कैसे दिया गया पत्रावलियों की जांच कर इसका पता लगाया जाएगा।

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