पंचस्नानी के एक स्नान पर संकट

Haridwar Updated Wed, 30 Jan 2013 05:30 AM IST
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हरिद्वार। पौराणिक कुशावर्त घाट और प्राचीन गऊघाट परस्पर सटे हुए हैं। वर्ष 1956 में शताब्दी पुल बनने के बाद गऊघाट का स्थल ताशबाजों का अड्डा बनता गया और कुशावर्त के चौक में जहां कर्मकांड हुआ करता था वहां गायों ने डेरा जमा लिया। हाल ही में विस्तारित कुशावर्त के प्लेटफार्म पर कर्मकांडियों का कब्जा होने से गंगा की पंचस्नानी का एक स्नान पूरी तरह ठप हो गया है।
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गौरतलब है कि गंगा स्नान तब पूर्ण होता है, जब हरकी पैड़ी, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वकेश्वर और कनखल के घाट पर पांच स्नान कर लिए जाएं। स्कंध पुराण के मंत्र-हरिद्वारे कुशावर्ते नीलके बिल्वपर्वते... स्नात्वा कनखले तीर्थे पुर्नजन्म न विद्यते, के अनुसार इन पांच स्थानों पर स्नान करने से स्नान पूर्ण होता है और फिर मनुष्य का पुर्नजन्म नहीं होता। हजारों श्रद्धालु आज तक पांचों घाटों पर पांच स्नान कर पूर्ण पुण्य अर्जित करते आए हैं।

विगत कुंभ पर महातीर्थ कुशावर्त के घाट का विस्तार प्लेटफार्म के रूप में किया गया। मंशा यह थी कि अधिक से अधिक स्नानार्थी कुशावर्त पर स्नान कर सकें। घाट विस्तार के तत्काल बाद कर्मकांडियों ने इस प्लेटफार्म पर कब्जा जमा लिया। अब पूरे दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक इस घाट के नए प्लेटफार्म पर यात्रियों को कर्मकांड कराया जाता रहा है और स्नान के लिए जगह शेष नहीं बची है। कर्मकांड के बाद जल में वस्तुओं के प्रवाह से जल भी स्नान योग्य नहीं रह गया है। परिणाम स्वरूप गंगा की पंचस्नानी का एक स्नान बाधित हो गया है। विगत भाजपा सरकार के शासन काल में शहरी विकास मंत्रालय ने पहल की थी कि कुशावर्त से गऊओं को हटाकर पुराने गऊघाट पर भेज दिया जाए, ताकि कर्मकांड के लिए कुशावर्त का चौक उपलब्ध हो जाए। ऐसा नहीं हो पाया और अब गंगा की पंचस्नानी पूरी तरह बाधित हो गई है।
ठीक गंगा किनारे न हो कर्मकांड
कुशावर्त पर कर्मकांड के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। बरामदों और आंगन में युगों से कर्मकांड कराया जाता रहा है। दुर्भाग्य का विषय है कि कहने के बावजूद पुरोहित भी इस स्थान पर अस्थि प्रवाह करा रहे हैं। साथ ही साथ क्रियाकर्म आदि भी स्नान घाट पर होने लगा है। यदि यात्री यहां स्नान ही नहीं कर पाएंगे तो पंचस्नानी का महत्व ही समाप्त हो जाएगा।
-वीरेंद्र श्रीकुंज, महामंत्री गंगा सभा
अब फिर करुंगा प्रयास
मंत्री के रूप में मैंने कुशावर्त और गऊघाट क्षेत्र का बार-बार दौरा किया। यही नहीं नगर निगम की पूरी टीम, सिंचाई विभाग और तत्कालीन जिलाधिकारी को लेकर सर्वे पूर्ण करा लिया गया। गंगा घाट को स्नान के लिए उपलब्ध कराने की मंशा से गायों को पुराने गऊघाट पर ले जाने की योजना तैयार कर ली गई थी। सरकार चले जाने के कारण वह कार्य अधूरा रह गया। अब नई सरकार को पंचस्नानी का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
-मदन कौशिक, विधायक और पूर्व मंत्री
जबरन खाली कराएंगे घाट
कर्मकांडियाें को चेतावनी दे दी गई है कि वे कुशावर्त के गंगा तट पर कर्मकांड और अस्थि प्रवाह न कराएं, इसके लिए कुशावर्त पर पर्याप्त स्थल मौजूद है। जहां तक अस्थि प्रवाह का प्रश्न वह हरकी पैड़ी के अस्थि प्रवाह घाट पर होना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद अवैधानिक रूप से कर्मकांड करा रहे लोगों को रोकने के लिए आगे आएगी।
-वीरेंद्र कीर्तिपाल, जिलाध्यक्ष-विश्व हिंदू परिषद

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